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Monday, August 20, 2018
Himachal

एनजीटी के खिलाफ जन संघर्ष कमेटी गठित

December 03, 2017 09:42 AM

शिमला - राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में शिमला के गृह मालिक एक बार फिर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकसाथ खड़े हो गये हैं। आज शिमला के विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने एनजीटी के फैसले के खिलाफ न केवल हुंकार भरी बल्कि आंदोलन की रूपरेखा भी बना डाली और इसके लिए शिमला जनसंघर्ष कमेटी भी गठित कर डाली। ये कमेटी एनजीटी के आदेशों के खिलाफ शिमला में आंदोलन खड़ा करेगी और प्रदेश सरकार पर भी इस मामले में तुरंत कानून राय लेकर कदम उठाने के लिए दबाव डालेगी। गोविंद चतरांटा को इस जनसंघर्ष समिति का संयोजक बनाया गया है।

एनजीटी के फैसले से पैदा हुए हालात पर चर्चा करने के लिए आज शिमला में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और स्वयंसेवी संगठनों तथा पंचायत प्रतिनिधियों का अधिवेशन हुआ। शिमला नागरिक सभा के बैनर तले इस अधिवेशन में एनजीटी के फैसले को लोकतंत्र विरोधी करार दिया गया और कहा गया कि इस फैसले का असर इतना गहरा है कि अभी से ही शिमला की जनता का जीना दूभर हो गया है।

शिमला नागरिक सभा के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि एनजीटी का निर्णय तानाशाही फैसला है। इस निर्णय को लेते वक्त नगर निगम व प्रदेश सरकार जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा स्टेक होल्डरों को विश्वास में नहीं लिया गया और न उनकी राय ली गई। इस ऑर्डर को लागू करवाने के लिए बनी मोनिटरिंग कमेटी के ज्यादातर सदस्य हिमाचल प्रदेश और शिमला से बाहर के हैं।

उन्होंने कहा कि इस निर्णय के अनुसार घरेलू भवनों को नियमित करने के लिए 5 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट व कमर्शियल भवनों को नियमित करने के लिए 10 हजार रुपए प्रति वर्ग फुट व पूरे भवन को रेगुलर करने के लिए 50 से 60 लाख रुपये देने होंगे। इतनी भारी राशि चुकाने के बजाए जनता को भवन छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एनजीटी के निर्णय से स्मार्ट सिटी पर ही खतरा पैदा हो गया है।

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