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Haryana

चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्याल जल्दी ही नाबार्ड एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन सैंटर की स्थापना करेगी

December 15, 2017 07:24 AM

चण्डीगढ़ - चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्याल, हिसार कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में स्टार्ट-अप के लिए युवाओं/उद्यमियों को मार्गदर्शन, प्रौद्योगिकी और आधारभूत संरचना प्रदान करेगा। इसके लिए विश्वविद्यालय द्वारा शीघ्र ही नाबार्ड एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन सैंटर (एनएबीआईसी) की स्थापना की जाएगी।

विश्वविद्यालय के एक प्रवक्ता ने आज यह जानकारी देते हुए बताया कि इस सैंटर के माध्यम से युवाओं एवं उद्यमियों को कृषि से सम्बद्ध विषयों जैसे कि फसल उत्पादन, फसल संरक्षण, जैव उर्वरक उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण तथा कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता वृद्धि और सुरक्षा मानकों, प्रमाणीकरण, ब्रैंडिंग, विभिन्न उत्पादों के विपणन आदि में प्रशिक्षित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि कृषि के क्षेत्र में बहुत से लोग नए कौशल एवं नई प्रौद्योगिकी का ज्ञान प्राप्त कर इस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं। इन युवाओं को कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में आत्मविश्वास और कुशल उद्यमियों के रूप में उभारने के लिए प्रोत्साहित करने और सहयोग देने की आवश्यकता है।

इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि में नवाचारों, कौशल निर्माण और कृषि एवं सम्बद्ध विषयों में उद्यमियता विकास को ध्यान में रखते हुए नाबार्ड को नाबार्ड एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन सैंटर (एनएबीआईसी) की स्थापना के लिए एक परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था जिसे नाबार्ड ने स्वीकार करते हुए 1174.85 लाख रुपये की अनुदान राशि प्रदान की है। इस परियोजना के अंतर्गत उद्यमियों/उद्योगों से संबंध विकसित करना, उत्पाद प्रसंस्करण एवं उनके उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार में अनुसंधान एवं विकास के लिए मंच प्रदान करना, बुनियादी सुविधाएं और तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करना शामिल हैं। इनके अलावा कृषि और संबद्ध विषयों में व्यावसायीकरण और स्टार्ट-अप कंपनियों के बिजनेस की स्थापना के लिए मार्गदर्शन करना व कार्य की सफलता और स्थिरता के लिए परामर्श, प्रशिक्षण, व्यवसाय सलाहकार सेवाएं प्रदान करना इस केन्द्र का प्रमुख कार्य होगा।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना की अवधि 4 वर्ष है और यह केंद्र उपलब्ध प्रौद्योगिकियों का भी व्यावसायीकरण करेगा तथा उद्यमियों को अपनी यूनिट स्थापित करने, नौकरियों का सृजन करने एवं छोटे और मझौले उद्यमियों को धन अर्जित करने के लिए कौशल विकसित करने में मदद करेगा। इसके परिणामस्वरूप राज्य का आर्थिक विकास भी होगा। केंद्र द्वारा नवाचारों तथा उद्यमियों के एग्री मॉडल्ज़ के परीक्षण और उन्हें उच्च स्तर पर ले जाने में आ रही बाधाओं के निवारण के लिए समाधान प्रदान करेगा।

केंद्र द्वारा क्षमता निर्माण, ज्ञान प्रसार, व्यवसाय विकास, विपणन आदि के संदर्भ में निरंतर पकड़ बनाए रखने से निश्चित तौर पर राज्य में कई उभरते उद्यमियों को फायदा होगा तथा रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इससे स्टार्ट-अप कल्चर को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

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