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Tuesday, January 23, 2018
Punjab

पंजाब कांग्रेस द्वारा शहीदी जोड़ मेले के अवसर पर राजनीतिक कान्फ्रेंस न करने का फैसला

December 22, 2017 08:33 AM

चंडीगढ़ - आम लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुये और इस दिवस की पवित्रता को मुख्य रखते हुये पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने फतेहगढ़ साहिब में शहीदी जोड़ मेले के दौरान राजनीतिक कान्फ्रेंस न करने का फ़ैसला लिया गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आज सुबह सांसद और पंजाब कांग्रेस के प्रधान सुनील जाखड़ के साथ इस मामले पर विचार-विमर्श करने के बाद यह फ़ैसला लिया।

पंजाब कांग्रेस के प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने यह महसूस किया कि सिखों के दशम पातशाह गुरू गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबज़ादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह जी और माता गुजरी जी की अतुल्य शहादत को बहुत ही श्रद्धा और सम्मान से मनाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी महसूस किया कि महान बलिदानों से सींची फतेहगढ़ साहिब की पवित्र धरती पर इस मौके को राजनीतिक लाभ लेने के लिए अपने निजी हितों के ख़ातिर प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फतेहगढ़ साहिब में दशम पातशाह गुरू साहिब जी के छोटे साहिबज़ादे और उनकी माता जी की बेमिसाल बलिदान को सजदा करने के लिए शहीदी जोड़ मेला सदियों से होता आ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग यह महसूस करते हैं कि यह पवित्र मौका राजनीतिक दलों द्वारा लाभ अर्जित करने का मंच बनकर उभर रहा है।

कैप्टन अमरिंदर सिंह और श्री जाखड़ ने लोगों को विशेषकर राजनीतिक नेताओं से अपील की कि वह राजनीतिक कान्फ्रेंस या रैलियां करने की बजाय गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब के पवित्र स्थान पर जा कर नम्र श्रद्धालुओं के तौर पर महान शहीदों को अपनी श्रद्धासुमन अर्पित करें। श्री जाखड़ ने कहा कि, ''हम सभी राजनीतिक दलों को इस पवित्र अवसर पर राजनीतिक कान्फ्रेंस करने से परहेज करने की अपील करते हैं। इससे पहले फतेहगढ़ साहिब के विधायक कुलजीत सिंह नागरा ने मुख्यमंत्री से मुलाकात करके उनको आम लोगों की भावना से अवगत् करवाया जो शहीदी जोड़ मेले के अवसर पर राजनीतिक कान्फ्रेंसों का विरोध कर रहे हैं।

श्री जाखड़ ने कहा कि पार्टी का यह फ़ैसला भी कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा अपने पहले मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान फतेहगढ़ साहिब में शहीदी जोड़ मेले की पवित्रता को बहाल करने के लिए उठाये कदमों के तर्ज पर ही लिया गया है जिनमें लंगर लगाने की उचित व्यवस्था कायम करने, मिठाईयों पर रोक, मनोरंजक खेल और जुऐ पर पाबंदी आदि शामिल हैं।

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