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Friday, April 20, 2018
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वर्ष 2017 में वापस पटरी पर लौटे भारत-नेपाल के संबंध

December 28, 2017 07:57 AM

काठमांडू - भारत-नेपाल रिश्ते वर्ष 2017 में एकबार फिर पटरी पर वापस लौट गए लेकिन इनका भविष्य पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि चीन की तरफ झुकाव रखने वाली देश की नई वामपंथी सरकार क्या रूख अपनाती है। भारत और चीन के बीच बसा हिमालय राष्ट्र ने 2017 में दोनों देशों के साथ अपने सैन्य संबंधों का विस्तार भी किया।

भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत और चीन में रक्षा मंत्री जनरल वांग यी ने सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए नेपाल की यात्रा की। अप्रैल में, नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने 2015 में पदग्रहण करने के तुरंत बाद सबसे पहले भारत यात्रा पर आई। यह भारत के साथ नेपाल के संबंधों को उजागर करता है। तब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा की थी।

नेपाल की राष्ट्रपति के भारत आने से पहले वित्त मंत्री अरण जेटली नेपाल निवेश शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वहां पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बुनियादी ढांचे की जरूरतों के आधार पर अपने पड़ोसी देश के समर्थन के लिए भारत की प्रतिबद्धता का दोहराया था। भारत ने तकनीकी संस्थानों के निर्माण के लिए अपने पड़ोसी देश को 4.4 करोड़ रुपए देने का वादा भी किया।

भारत के करीबी माने जाने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने भी भारत को दौरा किया और नरेंद्र मोदी सहित कई बड़े नेताओं से मुलाकात की। देउबा के दौरे से पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जुलाई में यहां आईएमएसटीईसी (बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी की पहल) की बैठक में शिरकत की थी।

भारतीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भी देश को दौरा किया और दिल्ली एवं कोलकाता को रेल के जरिए नेपाल से जोडऩे के मुद्दे पर चर्चा की। दोनों देशों के बीच रेल संपर्क है क्योंकि प्रमुख निर्यात एवं आयात का काम भारतीय बंदरगाहों के जरिए किया जाता है। चीन की महत्वकांक्षी पहल वन बेल्ट वन रिजन (ओबीओआर) का हिस्सा बनने के बाद नेपाल का बीजिंग की तरफ झुकाव बढ़ता दिखा, जिसे भारत संदिग्ध निगाह से देखता है।

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