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Tuesday, October 16, 2018
Chandigarh

इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम पर दोबारा विचार करेगा एमएचए - किरण खेर

December 29, 2017 07:43 AM

चंडीगढ़ (मयंक मिश्रा ) - केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) की ओर से यूटी इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम, 2008 पर दोबारा से विचार किया जाएगा। यह आश्वासन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने वीरवार को चंडीगढ़ की सांसद किरण खेर को दिया है। किरण खेर ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल आफ इंडिया चेतन मित्तल के साथ वीरवार को राजनाथ सिंह से मुलाकात की और उनसे यूटी कर्मचारियों की इस स्कीम पर दोबारा से विचार करने को कहा जिस पर राजनाथ सिंह ने सहमति दे दी। राजनाथ सिंह के इस आश्वासन के बाद अब यूटी के उन कर्मचारियों में अब एक बार फिर से आशा की किरण जागी है जो कि लगभग नौ सालों से चंडीगढ़ में अपने आशियाने का इंतजार कर रहे थे।

एमएचए ने यूटी प्रशासन की वर्ष 2008 में बनी इम्प्लॉइज हाउसिंग स्कीम को रद कर दिया था। इस संबंध में एक केबिनेट नोट मंत्रालय के पास आया था जिसे गृह मंत्री के समक्ष पेश किया गया था। हाईकोर्ट में चल रहे इस मामले के तहत एमएचए की तरफ से जो जवाब हाईकोर्ट में देने के लिए पत्र एडिशनल सॉलिसिटर जनरल आफ इंडिया श्री चेतन मित्तल को भेजा गया था उसमें स्पष्ट था कि वर्ष 2008 में यूटी के कर्मचारियों के लिए लांच की गई सेल्फ फाइनेंसिंग हाउसिंग स्कीम के लिए 61.5 एकड़ जमीन चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को अलॉट करने के मामले पर एमएचए ने विचार किया और इसे गृह मंत्री ने नामंजूर कर दिया। एचएचए ने इस स्कीम को नामंजूर करने का जो कारण स्पष्ट किया था उसके तहत यह कहा गया था कि पब्लिक लैंड का मतलब होता है कि जमीन का उपयोग किसी जनता के काम के लिए किया जाए और यह प्रस्ताव जनता की जरूरत के लिए नहीं माना जा सकता है।

इसके साथ ही इसे नामंजूर करने का एक कारण बताया गया था कि केंद्र सरकार को विभिन्न मंत्रालयों और भारत सरकार के विभिन्न विभागों के कार्यालय बनाने के लिए जमीन की जरूरत पड़ सकती है। चूंकि चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा की राजधानी है इसलिए पंजाब और हरियाणा को भी सरकारी या जनता के लिए चंडीगढ़ में जमीन की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा एक कारण कारण यह भी बताया गया है कि भविष्य में चंडीगढ़ की हाउसिंग कोआपरेटिव सोसाइटियां भी जमीन की मांग कर सकती हैं।

ध्यान रहे कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने प्रशासन को हाउसिंग स्कीम के लिए नया रेट तय करने को कहा था। बोर्ड ने प्रशासन से कहा था कि वह जमीन का नया रेट तय करे, जिससे फिर वह इस स्कीम पर आगे काम कर सकें। बोर्ड ने प्रशासन से कहा था कि उसके पास इंप्लाइज हाउसिंग के अलाटियों की अर्नेस्ट मनी जमा है। ऐसे में उस पर इसे शीघ्र लागू करने का दबाब है। पिछले 7 साल से इम्प्लॉइज हाउसिंग स्कीम के 3930 अलाटियों के 57 करोड़ रुपए हाउसिंग बोर्ड के पास जमा हैं। बोर्ड के पास मौजूदा समय में करीब 11 67 एकड़ जमीन है, जबकि इम्प्लॉइज हाउसिंग के लिए 67एकड़ जमीन और चाहिए।  चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड कोर्ट में भी कह चुका है कि वह इम्प्लॉइज हाउसिंग स्कीम के अलाटियों को फ्लैट्स देने के लिए तैयार है। प्रशासन ने इस मामले में पिछले साल एमएचए को पत्र लिखकर मंजूरी मांगी थी।

 यहां फंसा था मामला

चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों को हाउसिंग वेलफेयर स्कीम के तहत चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मकान उपलब्ध करवाने के मामले में प्रशासन ने केंद्रीय गृह विभाग के जरिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय से अनुमति मांगी थी। दरअसल, हाउसिंग बोर्ड के सामने सबसे बड़ी समस्या जमीन की बढ़ी हुई कीमत थी। प्रशासन चाहता था कि जमीन की कीमत वित्त मंत्रालय तय करे। चंडीगढ़ प्रशासन ने इस स्कीम के लिए जमीन रिजर्व रखी हुई है। जमीन की बढ़ी हुई कीमत के चलते यह स्कीम चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के बीच ही उलझकर रह गई थी। हाईकोर्ट में इस मामले पर पिछली कई सुनवाई के दौरान प्रशासन जहां हाउसिंग बोर्ड पर देरी करने का आरोप लगा रहा था, वहीं हाउसिंग बोर्ड चंडीगढ़ प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराता रहा है।

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