Follow us on
Wednesday, January 24, 2018
Chandigarh

अगले महीने 50 साल का होगा मानव मंगल स्कूल, गोल्डन जुबली लोगो हुआ रिलीज

December 30, 2017 09:06 AM

चंडीगढ़ (मयंक मिश्रा) - शहर में 1968 में सिर्फ 40 छात्रों के साथ स्कूल शुरू करने वाले मानव मंगल ग्रुप आफ स्कूल्स अगले महीने अपनी स्थापना के 50 साल पूरे कर रहा है। शुक्रवार को स्कूल के “गोल्डन जुबली लोगो” के रिलीज के साथ ही स्कूल के गोल्डन जुबली सेलीब्रेशंस की शुरुआत हो गई। स्कूल के संस्थापक चेयरमैन जीएस सरदाना ने स्कूल के प्रेजीडेंट एमपी गुप्ता व डॉयरेक्टर संजय सरदाना और संदीप सरदाना के साथ स्कूल का लोगो रिलीज किया। मानव मंगल सिमार्ट स्कूल, मोहाली के सभागार में हुए इस कार्यक्रम में आईएएस अधिकारी व मोटिवेशनल स्पीकर विवेक अत्रे सम्मानित अतिथि के तौर पर मौजूद थे। स्कूल का लोगो में लिखे शब्द ‘लीगेसी ऑफ ऑनेस्ट एफर्ट्स' स्कूल के 50 साल के सफर को अभिवयक्त करता है। विवेक अत्रे ने अपने संबोधन में स्कूल को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि स्कूल ने जिस तरह से हर साल बेहतर रिजल्ट देते हुए ऊंचाइयों को छुआ है वह काबिले तारीफ है।

स्कूल के गोल्डन जुबली सेलीब्रेशंस की शुरुआत जाने माने ऐप डिवेलपर कनाडा निवासी 14 वर्षीय तन्मय बख्शी और न्यूयार्क के इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, प्राइवेट इक्वटी के एक्सपर्ट व एंट्रप्रेन्योर हरजीत सिंह द्वारा दी गई टीईडी एक्स चंडीगढ़ टॉक्स से हुई। मात्र पांच साल की उम्र से ही कंप्यूटर प्रोग्राम्स बनाना शुरू करने वाले तन्मय की चर्चा देश विदेश में होती है। दुनिया के सबसे छोटी उम्र के ऐप डेवलपरों में उसका नाम शुमार होता है। वह न सिर्फ कई एप और सोर्स कोड लिख चुका है बल्कि उसने प्रोग्रामिंग लैंग्वेज स्विफ्ट पर एक किताब हेलो स्विफ्ट भी लिखी है।

स्कूलों में सिखाई जानी चाहिए कोडिंग: तन्मय

कार्यक्रम में उन्होंने आईबीएम वॉटसन और कृतिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़ी तकनीकी बारीकियों और मशीन लर्निंग अल्गोरिथम के साथ-साथ अपने इस बेहतरीन सफ़र के अनुभवों को भी साझा किया। तन्मय ने कहा कि कोडिंग आज समय की जरूरत है तथा स्कूलों को अन्य विषयों की तरह कोडिंग की शिक्षा भी जल्द से जल्द देनी शुरू करनी चाहिए। कम उम्र में खेल खेल में बच्चे आसानी से कोडिंग सीख जाते हैं। घर पर ही अपने पिता से कोडिंग सीखने वाले तन्मय ने कहा कि एक लाख लाख भावी कोडर्स को कोडिंग सिखाना और प्रेरित करना उनका मिशन है।

इस दौरान हरजीत सिंह  ने कहा कि लोगों को पैसे की कीमत समझनी चाहिए और निवेश करना सीखना चाहिए। उन्होंने अपने संघर्ष की कहानी भी बताई कि किस तरह से वह कार ड्राइवर के तौर पर अपना बायोडाटा कार में पीछे चिपका कर घूमते थे। मानव मंगल ग्रुप आफ स्कूल्स की चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और जीरपकुर शाखाओं से आए छात्र-छात्राओं ने दोनों स्पीकर्स से सवाल पूछे।

Have something to say? Post your comment