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Tuesday, October 16, 2018
Chandigarh

पीजीआई बना देश का दुसरा सबसे बेहतरीन अवार्ड

December 31, 2017 09:24 AM

चंडीगढ़ (विजय राणा) - साल 2017 पीजीआई के लिए बेहतरीन रहा। इस साल पीजाआई ने स्वास्थय सेवाओं ने कई कीर्तिमान स्थापित किए और कई नई तकनीकों को भी शुरु किया। एक तरफ इस साल पीजीआई देश का दुसरा सबसे बेहतरीन अस्पताल बना वहीं पीजीआई देश का सबसे ज्यादा ट्रांसप्लांट करने वाला अस्पताल भी बना। इसके अलावा पीजीआई ने कई नई परियोजनाओं को शुरु किया गया। जिनके पूरा होने पर पीजीआई कई अन्य आधुनिक सुविधाओं से लैस हो जाएगा।

-पीजीआई को आई प्रोमोशन के लिए मिला ऑवर्ड

पीजीआईको इस वर्ष आई डोनेशन की प्रोमोशन के लिए हैल्थ एक्सीलेंस अवॉर्ड फॉर परमोशन आई  डोनेशन अवॉर्ड मिला है। ताइवान में आयोजित एक कार्यक्रम में पीजीआईकी तरफ से अस्पताल प्रशासन के हेड प्रोफेसर एंव एम.एस. ए.के. गुप्ता ने यह अवॉर्ड ग्रहण किया था। दुनिया भर से 131 देशों ने भाग लिया, जो कि 24 देशों की 90 संस्थाओं के लिए थी। पी.जी.आई के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। संस्थान लगातार आई परमोशन को लेकर काम कर रहा है। आई डोनेशन में 93 फीसद तक बढ़ोतरी हुई है।

-सबसे ज्याद ब्रेन डेड मरीजों के किए ऑर्गन ट्रांसप्लांट

इस वर्ष पीजीआई ब्रेन डैड मरीजों के ओर्गन ट्रांसप्लांट करने में देश के सभी अस्पतालों से आगे रहा। अस्पताल ने इस वर्ष 42 ब्रेन डेड मरीजों के ओर्गन ट्रांसप्लांट कर कई लोगों की जिंदगी बचाई। इतनी बड़ी सं या में अब तक देश के किसी भी अस्पताल ने ओर्गन ट्रांसप्लांट नहीं किए है। इसी को देखते हुए इस वर्ष पीजीआईको मिनिस्ट्री ऑफ हैल्थ एंड फैमिली वेलफेयर ने ऑवर्ड देकर स मानित भी किया। न सिर्फ अस्पताल में बल्कि 11 बार ग्रीन कोरिडोर बनाकर कई अस्पताल से ओर्गन शेयर कर वहां के मरीजों की भी जिंदगी पीजीआई की बदौलत बच पाई है जो कि अपने आप में एक रिकार्ड है।

-तीन बड़े सैंटर्स को मिले 1475 करोड़ रुपए

पीजीआई में एक लंबे वक्त से तीन बड़े सैंटर्स को बनाने की योजनाएं चल रही है लेकिन बजट इनकी रुकावट बन रहा था। एडवांस मदर एंड चाइल्ड केयर सैंटर, एडवांस न्यूरोसाइंस सैंटर, उना के सैटेलाइट सैंटर के लिए इस वर्ष हैल्थ मिनिस्ट्री ने 1475 करोड़ का बजट पास कर दिया है।

-एडवांस मदर एंड चाइल्ड केयर सैंटर

पीजीआईमें बनने वाले एडवांस मदर एंड चाइल्ड केयर सैंटर के लिए 485 करोड़ रुपए सैंक्शन हुए हैं। 300 बेड के इस सैंटर में कई अत्य आधुनिक टैक्नोलॉजी होगी। डायरैक्टर डा. जगत राम की माने तो नॉर्थ रीजन में इसके मुकाबले का कोई सैंटर नहीं होगा। जहां मदर एंड चाइल्ड केयर की हर जरूरत का ध्यान रखा जाएगा। ह्यूमन मिल्क बैंक, एडवांस इंर्फटलिटी ट्रीटमेंट, रोबोटिक सर्जरी, नवजात बच्चों के लिए सभी सुविधाएं यहां मुहैया होगी।

-न्यूरोसाइंस सैंटर को मिले 495.31 करोड़

पीजीआईमें बनने वाले नए न्यूरो साइंस सेंटर में अब न्यूरो सर्जरी व न्यूरोलॉजी की मरीजों का इलाज एक ही जगह हो पाएगा। 300 बेड का इस अस्पताल पर 495.31 करोड़ की लागत आएगी। यह सेंटर को पीजीआईकैंपस में ही बनाने के लिए मंजूरी मिल गई है। 6 मजिंल के बनने वाले इस सेंटर के कंस्ट्रक्षन के टैंडर का प्रोसेस 11 मई को होने वाली पीजीआईगर्वनिंग बॉडी की मीटिंग के बाद शुरु हो चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भी इस सेंटर के पहले फेज को मंजूरी दे चुका है। अभी तक

न्यूरो सर्जरी व न्यूरोलॉजी के मरीजों का इलाज अलग अलग किया जाता है लेकिन सेंटर के बन जाने के बाद मरीजों को एक ही जगह इलाज मिलेगा। इसके साथ ही स्कल बेस सर्जरी फंकश्रल सर्जरी के लिए आधुनिक ओ.टी की सुविधा यहां होगी व साथ ही ब्रेन स्ट्रोक न्यूरो डीजेनरेटिव डिसऑर्डर का इलाज भी यहां होगा।

-485 करोड़ की लागत से बनेगा उना सेटेलाइट सैंटर

उना में बने रहे सेटेलाइट सैंटर के लिए इस वर्ष हैल्थ मिनिस्टरी ने 495 करोड़ रुपए सैंक्शन किए हैं। 300 बेड के इस अस्पताल के बन जाने के बाद पीजीआईमें बढ़ते मरीजों की सं या को रोका जा सकेगा। पीजीआईप्रशासन की माने तो हिमाचल से एक बड़ी तादाद में मरीज पीजीआईआते हैं ऐसे में हिमाचल के लोगों को उनके नजदीक ही अच्छी अच्छी मैडीकल सुविधाएं मिल पाएगी, जिससे मरीजों को पीजीआईनहीं आना पड़ेगा। सैंटर में गॉयनी, मैडीसन,  जरनल सर्जरी, पैडएट्रिक्स, इ.एन.टी., रेडियोलॉजी समेत कई तरह की लेटेस्ट सुविधाएं मरीजों को यहां मिल पाएगी।

-पीजीआईपैडएट्रिक विभाग में हुई पहली रोबोटिक सर्जरी

रोबोटिक सर्जरी की सुविधा देने वाला पीजीआईदेश के चुनिंदा अस्पतालों में से एक है लेकिन इस वर्ष रोबोट द्वारा  बच्चे की सर्जरी कर पीजीआईपहला ऐसा अस्पताल बन गया है जहां रोबोट की मदद से किसी बच्चे की सर्जरी की गई हो। पीजीआईमें पिछले तीन वर्षो से रोबोटिक सर्जरी की सुविधा मरीजों को मिल रही है। 11 वर्षीय बच्चे की किडनी में परेशानी थी। जिसका ऑपरेशन रोबोट की मदद से किया गया। पैडएट्रिक सर्जरी विभाग के हैड डा. राम समुझ की अगुवाई में 7 डाक्टरों की टीम ने रोबोट की मदद से बच्चे की सर्जरी को करने में सफलता हासिल की है। इसके साथ ही इस वर्ष में पहली बार हैड एंड नेक रोबोटिक सर्जरी पर वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस वर्ष पीजीआईमें अब तक रोबोट की मदद से 84 सर्जरी की जा चुकी है जिसमें 803 यूरोलॉजी, 5 गॉयनोकोलॉजी, 118 ई.एन.टी. और 4 पैडएट्रिक विभाग में की जा चुकी है।

- रिसर्च की दिक्कतों की दूर करने के लिए नई सुविधा

एडवांस रिसर्च व रिसर्च के वक्त आने वाली रुकावटों को दूर करने के लिए इस वर्ष जुलाई में पीजीआईरिसर्च ब्लॉक ए. में एडवांस माइक्रोबॉयल रिसर्च सुविधा शुरू की गई। यह सुविधा मेडिकल माइक्रोबॉयलॉजी की एडवांस रिसर्च के लिए काफी फायदेमंद होगी जिसमें तीन स्टेज में इस लैबोट्री में काम किया जाएगा। पहली लैब में उस बैक्टीरिया पर रिसर्च की जाएगी जिसे रिसर्च के वक्त ज्यादातर अनदेखा क दिया जाता है। अब इस लैब की बदौलत इन बैक्टीरिया से संबधित बीमारियों जैसे रिकटिसियल इंफैकशन(संक्रमण),स्क्रब टाइफस, लेप्टोस्परियल इंफैकशन(जानवरों से फैलने वाला संक्रमण) जैसे कई रोगों के बारें में व उसके बचाव पर रिसर्च यहां हो सकेगी। पीजीआईमें रिकटिसियल इंफैकशन(संक्रमण) के बचाव को लेकर शुरू हुई यह सुविधा इंडिया में अभी तक किसी और अस्पताल में नहीं है।

-पीजीआईलीवर मरीजों के लिए क्लीनिक की शुरू आत

मरीजो की इतनी बड़ी तादाद को देखते हुए पीजीआईप्रशासन ने इस वर्ष लीवर मरीजों के लिए अलग से लीवर ट्रांसप्लांट क्लीनिक खोला है। लीवर ट्रांसप्लांट से गुजर चुके मरीजों व जिन मरीजों को ट्रांसप्लांट की जरूरत है उन मरीजों को इस क्लीनिक से काफी फायदा होगा। पीजीआईमें लीवर ट्रांसप्लांट मरीजों की देशभाल के लिए अलग कोई सुविधा नहीं थी लेकिन इसके शुरू होने से डाक्टर्स के साथ साथ मरीजों को बढ़ी सं या को भी  लाभ होगा। लीवर ट्रांसप्लांट के पहले व ट्रांसप्लांट होने के बाद मरीजों को इस क्लीनिक में उचित फॉलोअप मिलेगा, क्लीनिक की सबसे खास बात यह है कि दूसरे राज्यों से लीवर ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों का भी यहां फॉलोअप हो सकेगा।

-एम्स के बाद पीजीआई बना बेस्ट अस्पताल

बेहतरीन रिसर्च, अच्छी मैडीकल एजुकेशन व पेंशट केयर के लिए पीजीआईका नाम नॉर्थ इंडिया के कुछ चुनिंदा अस्पतालों में शामिल है। इन्ही खुबियों को देखते हुए इस वर्ष पीजीआईको देश के 15 बैस्ट अस्पतालों में दूसरे नंबर पर चुना गया।

द वीक नलसन सर्वे-2017 में पीजीआईने कई अस्पतालों को पीछे छोड़ते हुए दूसरा नंबर हासिल किया। सर्वे में शमिल देश के 15 अस्पतालों में ए स दिल्ली ने पहला स्थान हासिल किया है जबकि पीजीआईदूसरे पायदान पर रहा।

पहला लंग ट्रांसप्लांट हुआ फेल 

इस साल कई सफलताओं के साथ साथ पीजीआई को एक असफलता का सामना करना भी करना पड़ा। ने इस वर्ष अपना पहला लंग ट्रांसप्लांट भी किया, लेकिन ये ट्रांसप्लांट सफल नहीं हो पाया और मरीज की एक महीने बाद ही मौत हो गई।

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