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Wednesday, July 18, 2018
Chandigarh

चंडीगढ़ में ऊंची इमारतों में चल रहे क्लबों में किसी भी समय हो सकता है हादसा

December 31, 2017 02:51 PM

चंडीगढ़ (संदीप खत्री) - मुंबई के पब की तरह आगजनी की घटना चंडीगढ़ में भी घट सकती है और जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। शहर में भी कई ऐसे पब, बार व डिस्को चल रहे हैं जो राम भरोसे हैं। प्रशासन की ओर से इन स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। नए साल पर इन स्थानों पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ेगी। शहर में करीब तीन दर्जन क्लब चल रहे हैं। इनमें से कई क्लब कई मंजिला इमारतों में चल रहे हैं, जोकि नियमों कानूनों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

सवाल अब यह उठता है कि यदि मुबई की तरह चंडीगढ़ में इन ऊंची इमारतों में ऐसी कोई आगजी की घटना घट जाए तो क्या फायर विभाग आग पर काबू पा सकेगी ? पहली बात तो यह है कि ऐसी घटना होने पर फायर विभाग की गाडिय़ां ही घटनास्थल पर पहुंचने से पहले फंस जाएगी, चूंकि डिस्कोथैक के आस-पास की पार्किंग के एरिया को पूरी तरह से गाडिय़ों ने घेरा हुआ होता है। इस लिए आग पर काबू पाना नामुमकिन होगा। प्रशासन यह सब कुछ जानने के बाद भी अंजान बना हुआ है।

सवाल अब यह उठता है कि क्या मुंबई की घटना से चंडीगढ़ प्रशासन कोई सबक लेगा या नहीं ? बता दें कि मुबई के एक रूफटॉप पब में वीरवार देर रात लगी आग में कई परिवारों की खुशियां जलकर राख हो गई। ऊंची इमारत में चल रहे पब में आग लगने से आस पास के प्रतिष्ठानों को भी आग ने अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई, जिसमें 11 महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं। 55 के करीब लोग झुलस गए।

बेसमेंट में बने डिस्को लोगों के लिए बन सकते हैं बहुत खतरनाक

शहर में कई डिस्को ऐसे भी हैं जो बेसमेंट में चल रहे हैं। इन डिस्को में एक ही गेट है जहां से एंट्री और एग्जिस्ट की जाती है। किसी क्लब में यदि बाहर निकलने वाला रास्ता है भी तो उसकी जानकारी लोगों को नहीं है। होटल संचालकों द्वारा भी डिस्को में आने वाले लोगों को इसकी जानकारी नहीं दी जाती। बेसमेट में यदि किसी प्रकार की कोई बड़ी घटना हो जाती है तो कई लोगों की जान जा सकती है।

डिस्कोथैक में नहीं बाहर निकलने वाले रास्ते, घटना होने पर क्या होगें हालात ?

शहर के ज्यादातर डिस्कोथैक में एंट्री और बाहर निकलने का एक ही रास्ता बना हुआ है। ऊंची मंजिलों में बने डिस्को में भी यही हाल है। एमरजेंसी में बाहर निकलने के लिए यदि कुछ क्लबों में रास्ते बने हुए हैं तो उसकी लोगों को जानकारी ही नहीं है। सैकड़ो लोग क्लब के भीतर मौजूद रहते हैं। एंट्री के रास्ते संर्कीण हैं कि चार आदमी भी एक साथ यहां से बाहर नहीं निकल सकते। डिस्को में काम करने वाले स्टाफ को भी आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्रों के इस्तेमाल करने का अनुभव नहीं है। अब प्रशन यह है कि यदि इन स्थानों पर आगजनी की घटना घट जाए तो क्या लोग यहां से सुरक्षित बाहर निकल पाएंगे ?

फायर विभाग चार-पांच साल से गहरी नींद में

शहर के एक डिस्को संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले चार-पांच सालों से फायर विभाग के कर्मी उनके क्लब में आए ही नहीं। यदि कोई कर्मी आते भी है तो वह सिर्फ यह पूछकर चले जाते हैं कि अग्निशमन यंत्र की डेट रीन्यू करवाई गई है या फिर नहीं। इसके अलावा उन्हें फायर विभाग की ओर से अग्निशमन यंत्र इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग तो दूर जानकारी भी नहीं दी जाती। कई क्लबों में तो अग्निशमन यंत्र है ही नहीं।

मॉल में बने क्लबों से साथ वाले प्रतिष्ठानों को हो सकता है भारी नुकसान

शहर के मॉल्स में चलने वाले क्लबों में आगजनी की घटना होने से साथ वाले प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान हो सकता है। चूंकि इन जगहों पर फायर विभाग की गाडिय़ां नहीं जा सकती। यदि फायर कर्मी भी आग पर काबू पाने का प्रयास करेंगे तो बहुत समय लग जाएगा। इस लिए यहां पर भारी नुकसान हो सकता है। मॉल्स में कई मंजिल ऊपर तक डिस्को चल रहे हैं।

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