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Wednesday, January 24, 2018
Chandigarh

स्टेशनरी घोटाले से जुडे दस्तावेज विजिलेंस को कहीं से भी नहीं मिल पाए

January 04, 2018 06:00 AM

चंडीगढ़ (संदीप खत्री) - साल 2017 भी निकल गया, लेकिन अभी तक स्टेशनरी घोटाले के मामले में कोई रिजल्र्ट सामने नहीं आया। 2016 में इस मामले को पुलिस विभाग के एक कांस्टेबल ने उठाया था। इस मामले की एंक्वॉयरी  कर वीजिलेंस ने फाइल सीवीओ ऑफिस  (चीफ वीजिलेंस ऑफिस) को भेजकर वहां से स्टेशनरी ब्रांच के पूर्व इंचार्ज रामवीर सिंह भट्टी और अन्य के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए परमीशिन मांगी थी। लगभग तीन महीने बीत जाने के बाद भी सीवीओ ऑफिस से कोई जवाब आया, यानि कि फाइल अभी भी वहां दबी हुई है। साल 2018 शुरू हो गया, लेकिन न तो इस मामले में किसी के खिलाफ कारवाई हुई और न ही विजिलेंस की ओर से अभी तक किसी को क्लीन चिट्ट दी गई।

आरटीआई से कई बार मांगा रिकार्ड, एक बार एप्लीकेशन हुई रिजेक्ट, ब्रांच इंचार्ज ने ले ली थी वीआरएस सूत्रों ने बताया कि कांस्टेबल ने शिकायत में 2002 से लेकर 2016 तक कई लाख रुपए घोटाले का आरोप लगाया था।  2016 में पुलिस विभाग के एक कांस्टेबल को संदेह हुआ था कि पुलिस मुख्यालय में तैनात कुछ लोग गडबड़ी कर रहे हैं। कुछ लोगों ने स्टेशनरी का जाली बिल बनाकर महकमे को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया है। मामले का पर्दाफाश करने के लिए सिपाही ने कई बार पुलिस विभाग में आर.टी.आई. मांगी। एक एप्लीकेंशन आरटीआई ने रिजेक्ट कर दी गई । उसके बाद कांस्टेबल अपील के लिए आलाअधिकारियों के पास पहुंचा। इसी बीच स्टेशनरी ब्रांच के पूर्व  चार्ज रामवीर सिंह भट्टी ने वीआरएस ले ली, यानि कि रिटायरमेंट के समये से पहले ही महकमे से रिटायर हो गए।

आर.टी.आई. से जो शक्की दस्तावेज सिपाही को मिले वह उसने वीजिलेंस को सौंप दिए।

पुलिस मुख्यालय से नहीं मिले थे दस्तावेज, न मिले दुकान से सूत्रों ने बताया कि कांस्टेबल का यह कहना था कि पुलिस विभाग के कुछ लोगों की मिलीभगत से महकमे में हेराफेरी चल रही है। महकमे के कुछ कर्मचारी जाली नोटिंग शीट और डिमांड लैटर बनाकर लाखों रुपये ठग रहे हैं।

सेक्टर-17 की एक दुकान से बिल बनाए जाते थे। जब वीजिलेंस ने एसपी हेडक्वार्टर से अकाउंट से जुडे दस्तावेत और बिल मांगे थे तो वहां से जवाब में दस्तावेज गायब होने की बात सामने आई। वीजिलेंस ने फिर सेक्टर-17 स्थित दुकान से जब यह बिल मांगे तो उन्होंने भी नहीं दिए। कांस्टेबल के अनुसार पुलिस मुख्यालय में तैनात कर्मचारी अपने हाथों से भी बिल बनाया करते थे। पुलिस विभाग में जो भी सामान आता है उसका सिर्फ नकली बिल बनता है। खरीदा कुछ नहीं जाता। यहां से दुकानदारों को रुपये चले जाते हैं। वीजिलेंस के एक अफसर के अनुसार अभी इस मामले में किसी को क्लीन चिट नहीं दी गई।

स्टेशनरी ब्रांच के पूर्व इंचार्ज अन्य पर दर्ज हो सकती है एफआईआर

सूत्रों की माने तो वीजिलेंस ने स्टेशनरी घोटाले मामले में आगे की जांच करने के लिए सीवीओ ऑफिस से इजाजत मांगी है। सीवीओ ऑफिस को जो रिपोर्ट बनाकर वीजिलेंस ने भेजी है, उसमें साफतौर पर लिखा गया है कि उन्हें रामवीर सिंह भट्टी व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की परमीशिन दी जाए, ताकि इस मामले का पूरी तरह से पर्दाफाश हो सके। सूत्रों का कहना है कि सीवीओ से एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मिलने के बाद कई संदिग्ध लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। सूत्रों की माने तो सीवीओ की ओर से इस मामले में विजिलेंस को एफआईआर दर्ज करने की इजाजत मिल सकती है।

पूर्व एडमीनिस्ट्रेटिव डोगरा से भी विजिलेंस ने की थी पूछताछ

सूत्रों ने बताया कि सीवीओ ने वीजिलेंस से पूर्व एडमीनिस्ट्रेटिव ऑफिसर आरजी डोगरा की विजिलेंस क्लीयरेंस (एनओसी) मांगी थी। विजिलेंस ने साफतौर पर जवाब देते हुए कहा था कि डोगरा के खिलाफ भी एंक्वॉयरी चल रही है और उसे एनओसी नहीं दी जा सकती। इसी के चलते डोगरा को एक्सटैंशन की अप्रूवल नहीं मिली। बता दें कि आरजी डोगरा से भी वीजिलेंस ने इस मामले में पूछताछ की थी। आरजी डोगरा ने महकमे में दो साल ओर नोकरी करने के  लिए प्रशासन से एक्सटैंशन मांगी थी।

विजिलेंस के डर से तो नहीं ली वीआरएस ?

बता दें कि रामवीर भट्टी ने पहले ही वीआरएस लेकर पुलिस विभाग से रिटायर हो गया था। सवाल अब यह उठता है कि रामवीर सिंह भट्टी ने कहीं वीजिलेंस के डर से तो नहीं वीआरएस ली ? चूंकि यदि वीजिलेंस इस मामले में उसके खिलाफ केस दर्ज कर लेती तो उसे रिटायरमेंट के दौरान मिलने वाले फाइदे नहीं मिलते।

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