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Friday, April 20, 2018
Punjab

उजाला योजना के तहत 16 वैनों को दी हरी झंडी

January 11, 2018 07:34 AM

साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली) - बिजली और सिंचाई मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने आज यहां ऐलान किया कि राज्य के प्रत्येक किसान को बिजली उपभोक्ता से बिजली उत्पादक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पंजाब सरकार कपूरथला जिले के नत्थू चाहल फीडर में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है।

इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत किसान न सिर्फ सौर ऊर्जा पर चलने वाले ट्यूबवेलों से अपने खेतों की सिंचाई कर सकेंगे बल्कि प्रयोग में न होने पर वह यह ऊर्जा बेच भी सकेंगे। नत्थू चाहल के 100 प्रतिशत कृषि फीडर अधीन 63 ट्रांसफार्मर हैं जिनसे 1899 हार्स पावर वाले 178 पंपों को बिजली मुहैया की जाती और प्रति पंप औसतन 10.66 हार्स पावर का भार है। इस फीडर के द्वारा अगस्त 2016 से अक्तूबर 2017 तक कुल 23.76 लाख यूनिट बिजली की खपत हुई। 6 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से  इसकी 142.56 लाख रुपये की प्रति वर्ष सब्सिडी बनती है।

इस पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा राणा गुरजीत सिंह ने आज यहां 'उजालाÓ प्रोग्राम के प्रति जागरूकता मुहिम शुरू करने के लिए करवाए गए समागम को संबोधन करने दौरान किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व अधीन पंजाब सरकार राज्य के तेज विकास के लिए वचनबद्ध है और इसलिए विलक्षण विचारों और तकनीकों को भी अमल में लाया जा रहा है।

राणा गुरजीत सिंह, जो स्वयं भी बिजली उत्पादन के क्षेत्र में माहिर हैं, उन्होंने कहा कि इस पायलट प्रोजेक्ट का प्रयोग इस प्रोजेक्ट की कामयाबी के परीक्षण के लिए किया जाएगा ताकि अगामी 5 सालों दौरान इस प्रोजेक्ट को सफलता पहले राज्यभर में लागू किया जा सके।

किसानों को मिलेगा फायदा

इस प्रोजेक्ट की महत्ता पर रोशनी डालते हुए राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के पूर्ण रूप में लागू होने से न सिर्फ पंजाब के प्रत्येक किसान को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी बल्कि सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष कृषि के लिए बिजली सब्सिडी पर खर्च किए जा रहे 7000 करोड़ रुपये की भी बचत होगी। उन्होंने बताया 'इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत किसानों की ट्यूबवेल मोटरों को बिजली बचत वाली 5 स्टार मोटरों के साथ तबदील कर दिया जाएगा जो सौर ऊर्जा से चलेंगी और प्रयोग में न होने के समय किसान यह सौर ऊर्जा बेच सकेंगे। इस स्वरूप किसान अपने ट्यूबवेल सिर्फ जरूरत समय ही चलाएंगे जिससे भू-जल का दुरुपयोग भी रुकेगा।

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