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लोहड़ी से जुड़ी है दुल्ला भट्टी की कहानी

January 13, 2018 07:16 AM

शनिवार को लोहड़ी का प्रसिद्ध त्यौहार है। इस त्यौहार की खासियत है कि इसमें किसी प्रकार का कोई व्रत या पूजा करने जैसा कोई नियम नहीं होता बल्कि इस त्यौहार में लोग तरह-तरह के ब्यंजन बनाते हैं और मौज मस्ती करते हैं। लेकिन इस त्यौहार की जब सबसे खास बात है वह इससे जुड़ी हुई लोक कथाएं। कुछ पौराणिक कथाएं भी हैं जिनके कारण यह त्यौहार मनाया जाता है।

लोहड़ी पर क्यों जलाते हैं आग?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, लोहड़ी के दिन आग जलाने को लेकर माना जाता है कि यह आग्नि राजा दक्ष की पुत्री सती की याद में जलाई जाती है। एक बार राजा दक्ष ने यज्ञ करवाया और इसमें अपने दामाद शिव और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया। इस बात से निराश होकर सती अपने पिता के पास और पूछा कि उन्हें और उनके पति को इस यज्ञ में निमंत्रण क्यों नहीं दिया गया। इस बात पर अहंकारी राजा दक्ष ने सती और भगवान शिव की बहुत निंदा की। इससे सती बहुत आहत हुईं और क्रोधित होकर खूब रोईं। उनसे अपने पति का अपमान नहीं देखा गया और उन्होंने उसी यज्ञ में खुद को भस्म कर लिया। सती के मृत्यु का समाचार सुन खुद भगवान शिव ने वीरभद्र को उत्पन्न कर उसके द्वारा यज्ञ का विध्वंस करा दिया। तब से माता सती की याद लोहड़ी को आग जलाने की परंपरा है।

लोहड़ी से ऐसे जुड़ी दुल्ला भट्टी की कहानी-

लोहड़ी के त्यौहार को लेकर एक लोककथा भी है जो कि पंजाब से जुड़ी हुई है। हालांकि कुछ लोग इसे इतिहास बताते हैं। कहा जाता है कि मुगल काल में बादशाह अकबर के समय में दुल्ला भट्टी नाम का एक युवक पंजाब में रहता था। कहा जाता है कि एक बार कुछ अमीर व्यापारी कुछ समान के बदले इलाके की लड़कियों का सौदा कर रहे थे। तभी दुल्ला भट्टी ने वहां पहुंचकर लड़कियों को व्यापारियों के चंगुल से मुक्त कराया। और फिर इन लड़कियों की शादी हिन्दू लड़कों से करवाई। इस घटना के बाद से दुल्हा को भट्टी को नायक की उपाधि दी गई और हर बार लोहड़ी को उसी की याद में कहानी सुनाई जाती है।

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