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प्रधानमंत्री कश्मीरी छात्रों को निशाना बनाये जाने पर चुप क्यों हैं - उमर

February 22, 2019 10:54 AM

श्रीनगर (भाषा) - नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने देश के विभिन्न हिस्सों में ‘कश्मीरियों को सुनियोजित तरीके से निशाना’ बनाये जाने के खिलाफ कुछ नहीं बोलने पर बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्षी कांग्रेस पर प्रहार किया। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्हें तो हम विशिष्ट राजनेता समझते थे लेकिन वह साधारण नेता निकले। उन्होंने कहा कि देश को भाजपा के विकल्प की जरूरत है न कि भाजपा की बी-टीम की।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें भाजपा से बहुत अधिक उम्मीदें तो थीं भी नहीं, हमें बस प्रधानमंत्री से उम्मीदें थीं। हमें आशा थी कि वह राजनीति को एक तरफ रखेंगे और कुछ कहेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘(कश्मीरियों को निशाना बनाये जाने पर)प्रधानमंत्री तो चुप हैं ही, निराशाजनक यह है कि विपक्षी पार्टी के नेतृत्व ने भी चुप्पी साध ली है। ’’

पुलवामा में 14 फरवरी को आतंकवादी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गये थे। जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक से उन कश्मीरी विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया जो पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद कथित धमकियों और मार-पीट के चलते देश के विभिन्न हिस्सों से लौटने को मजबूर हुए हैं।

उन्होंने कहा,‘‘उन कश्मीरी विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत है तो अपने उपर हमले की आशंका में घर लौट आए हैं।’’ उन्होंने कहा कि इस बात का इंतजाम किया जाए कि इन विद्यार्थियों का अकादमिक नुकसान न हो।

नेकां नेता ने कहा कि कश्मीर के लोग कांग्रेस से सहानुभूति और नैतिक समर्थन के दो शब्द सुनने की उम्मीद कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘आज, उसने (कांग्रेस ने) संवाददाता सम्मेलन किया, जहां हर बात का जिक्र किया गया। लेकिन, उन्हें (कश्मीरियों को) सुनियोजित ढंग से निशाना बनाये जाने पर भी बोलना चाहिए था। ये वहीं ताकतें हैं जिनसे कांगेस शब्दों से लड़ रही है और उन्हें हराना चाहती है... हमें अफसोस है कि कांग्रेस ने इन ताकतों के खिलाफ प्रभावकारी ढंग से अपनी आवाज नहीं उठायी। ’’

जब अब्दुल्ला से पूछा गया कि कश्मीरियों पर हमले के पीछे क्या भाजपा का हाथ है तो उन्होंने कहा कि उनके पास इसके लिए ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन चुप्पी तो निश्चित तौर पर है।’’

उन्होंने इसी के साथ यह भी याद किया कि 27 नवंबर, 2008 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राष्ट्रीय टीवी पर सामने आये थे। उससे एक दिन पहले मुम्बई में 26/11 आतंकवादी हमला हुआ था।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘मनमोहन सिंह ने ... शांति का आह्वान किया था और यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया था कि किसी के भी द्वारा कानून व्यवस्था हाथ में लेने का प्रयास न हो, कि किसी खास समुदाय को चुनिंदा तरीके से निशाना नहीं बनाया जाए।’’

उन्होंने कहा कि 26/11 हमला पुलवामा हमले से भी अधिक बड़ा और भयावह था और जम्मू कश्मीर के लोगों को इसके बुरे नतीजे की आशंका थी।

उन्होंने कहा,‘‘मनमोहन सिंह से सीख लेने और देशवासियों से ऐसा कुछ नहीं करने की अपील करने की वर्तमान प्रधानमंत्री से उम्मीद करना अनुचित नहीं होगा। (लेकिन) यह तो ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने कहा है कि जो नयी ट्रेन की आलोचना करता है उसे दंडित किया जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अप्रत्याशित रूप से, हमारे प्रधानमंत्री के लिए किसी पूरे समुदाय पर हमले और उसे खलनायक के रूप में चित्रण से कहीं अधिक चिंता का विषय ट्रेन की आलोचना है। अब ऐसे प्रधानमंत्री हैं, मुझे माफ कीजिए, जिनकी प्राथमिकता मैं समझ नहीं पाता।’’

जब उनसे यह पूछा गया कि क्या कांग्रेस चुनाव के कारण चुप्पी साधी हुई है तो उन्होंने कहा, ‘‘मेरे हिसाब से यह देश को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाना होगा। देश को भाजपा के विकल्प की जरूरत है न कि भाजपा की बी-टीम की। मैं आशा करता हूं कि कांग्रेस और समान विचारधारा वाली अन्य सभी पार्टियां और सही विचारधारा वाली पार्टियां कश्मीरियों को सुनियोजित ढंग से निशाना बनाये जाने के खिलाफ मजबूत कदम उठायेंगी। ’’

अब्दुल्ला का कहना था कि पाकिस्तान के साथ वार्ता पुलवामा जैसे हमलों के आलोक में नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘वह (पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और प्रशासन) भले ही वार्ता की पेशकश करें लेकिन पुलवामा जैसे हमलों की पृष्ठभूमि में बातचीत नहीं हो सकती है। आपको (पाकिस्तान को) कुछ ठोस कदम उठाने की जरूरत है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे प्रधानमंत्री ने मुंहतोड़ जवाब देने की बात कही है लेकिन वर्तमान स्थिति में ऐसा संभव नहीं है... खासकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के यह कहने के बाद कि पाकिस्तान जवाब देने का केवल विचार ही नहीं करेगा, जवाब देगा भी।’’

अलगाववादियों समेत 155 राजनीतिक व्यक्तियों की सुरक्षा वापस लिये जाने पर अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘किसी के द्वारा सुरक्षा का दुरूपयोग किये जाने की मुझे खबर नहीं है। राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा वापस लेने से वे राजनीतिक जगह भर नहीं पायेंगे। मैंने पहले ही कह दिया है कि यह प्रतिगामी कदम है और इसपर पुनर्विचार हो। अन्यथा हम अदालत जायेंगे।’’

उन्होंने हर कश्मीरी चीजों का बहिष्कार करने का समर्थन करने पर मेघालय के राज्यपाल तथागत राय की भी आलोचना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ में हमलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी ने भी राज्य में लोगों को दंडित करने की मांग नहीं की।

उन्होंने कहा, ‘‘... हमें दंडित क्यों किया जा रहा है? क्या केवल इसलिए क्योंकि देश में हम एकमात्र मुस्लिम बहुल राज्य हैं? उन्होंने चेतावनी दी कि कश्मीरियों को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने से राज्य के लोग और अलग थलग महसूस करेंगे।

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