Follow us on
Tuesday, June 25, 2019
Feature

गलत लाइफस्टाइल के कारण चंडीगढ़ की 76 फीसदी महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त

April 08, 2019 06:19 AM

चंडीगढ़ - गलत लाइफस्टाइल और खानपान की वजह से इन दिनों शहर की महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधित कई परेशानियां झेलनी पड़ रही है। जिनमें से मोटापा और एनिमिया विशेष है। आंकड़ों के मुताबिक शहर की 76 प्रतिशत महिलाएं अन्य पड़ोसी राज्यों के मुकाबले एनीमिया ग्रस्त हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार यहां 6 से 59 महीने तक की आयु वर्ग के 73 परसेंट बच्चे एनीमिया का शिकार हैं। जिसके चलते भारत सरकार के खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने वर्ल्ड बैंक के साथ मिलकर चंडीगढ़ में ईट राइट, ईट फोर्टिफाइड अभियान भी शुरू किया गया है। 

इस मामले में एफएसएसएआई के सीईओ पवन अग्रवाल के मुताबिक अधिक नमक, चीनी और तली हुई चीजों का सेवन कम करें और फूड सेफ्टी जैसी महत्व की चीजों को भी इसमें शामिल किया गया है। क्योंकि अधिकतर लोग फूड फोर्टिफिकेशन और इसके स्वास्थ्य लाभ से अनजान हैं। फूड फोर्टिफिकेशन एनीमिया जैसे छोटे-छोटे पोषक तत्वों की कमी से लडऩे के लिए एक ठोस रणनीति है। उन्होंने बताया कि मां का दूध बच्चे को छह महीने तक देना जरूरी होता है लेकिन लोग बदलते लाइफस्टाइल में इससे बच्चों को दूर कर रहे हैं जो बच्चों को गंभीर रोगों के शिकार होने के लिए धकेल रहे हैं।

देश में 58.4 परसेंट बच्चे एनीमिया के शिकार:

आंकड़ो के मुताबिक देश में 58.4 परसेंट बच्चे एनीमिया के शिकार हैं तो 53.1 परसेंट महिलाएं, 22.7 परसेंट पुरुष एनीमिया की चपेट में हैं। वहीं 5 साल से कम उम्र के 35.7 प्रतिशत बच्चे अंडरवेट हैं। अग्रवाल ने बताया कि डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के मुताबिक भारत में एक व्यक्ति 10 से 11 ग्राम नामक का सेवन कर रहा है, जबकि 4 से 5 ग्राम से ज्यादा नमक का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

मोबाइल फोन के अधिक प्रयोग से बढ़ रहा मोटापा:

मोटापा आजकल की जीवनशैली की देन है जोकि खानपान व मोबाइल एवं  टीवी से जुडी हुई है। खानपान में जंक फूड के बढ़ते चलन व लोगों के टीवी-मोबाइल से चिपके रहने की आदत से मोटापे की समस्या पैदा होती है व यही मोटापा बाद में कई अन्य घातक बीमारियों का कारण बनता है। यह बात डाइट क्लिनिक हेल्थ केयर (प्रा.) की ओर से चंडीगढ़ सेक्टर-18 में खोले गए डाइट क्लिनिक की डायटीशियन गगन आनंद ने बताया।

उन्होंने कहा कि बच्चे भी बाहर मैदान में जाकर खेलने की बजाये ऑनलाइन गेम्स खेलने में समय लगाते हैं जोकि बेहद ही गलत है। उन्होंने बताया की उनके यहां ऐसे भी केस आतें हैं जिनमें 16-17 साल के बच्चों का वजन 100 किलोग्राम के आसपास पाया गया। उन्होंने कहा कि खानपान की आदतों को सुधारने व कुछ अनुशासित जीवनशैली अपनाकर ही बेकाबू मोटापे को ठीक किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि हमें अपनी रूटिन में डाइट चार्ट को शामिल करना जरूरी हैं, जो हमारें जागने, सोने व खाने के समय का निर्धारण करें, तभी मोटापे से राहत मिल सकती है। इसके साथ ही मौसमी फलों और सब्जियों का अधिकाधिक इस्तेमाल करना चाहिए। सुबह 7 बजे हर हाल में बिस्तर से उठकर कुछ व्यायाम या योग व सैर करें। इस प्रक्रिया का पालन करने से एक माह में तीन से चार किलो वजन आसानी से कम किया जा सकता है।

Have something to say? Post your comment