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Tuesday, June 25, 2019
Himachal

सुख राम के बेटे अनिल शर्मा ने हिमाचल की भाजपा सरकार से दिया इस्तीफा

April 13, 2019 07:24 AM

शिमला (भाषा) - हिमाचल प्रदेश के उर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने राज्य की भाजपा सरकार के मंत्रिपरिषद से शुक्रवार को त्यागपत्र दे दिया । इससे कुछ ही दिन पहले कांग्रेस ने उनके बेटे आश्रय शर्मा को प्रदेश के मंडी लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवर बनाया था ।

शर्मा के पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुख राम तथा आश्रय ने पिछले महीने भाजपा छोड़ कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया था । इसके बाद से ही अनिल शर्मा पर भारतीय जनता पार्टी का दवाब था । अनिल शर्मा ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कार्यालय में त्यागपत्र भेजने के बाद प्रेट्र के बताया, ‘‘मैने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया है क्योंकि मेरे विधानसभा क्षेत्र मंडी में मुख्यमंत्री ने कल एक जनसभा में कहा था कि ‘मेरे मंत्री (अनिल शर्मा) कहीं खो गए हैं, अगर उनके ठिकाने के बारे में किसी को पता है तो मुझे इससे अवगत करायें ।’’

शर्मा ने कहा कि ठाकुर के व्यंग्यात्मक टिप्पणियों के कारण ही वह मंत्रिपरिषद से त्यागपत्र देने के लिए मजबूर हुए हैं क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री का उनमें अब भरोसा नहीं रहा । उन्होंने कहा, ‘‘अगर मुख्यमंत्री का अपने मंत्री पर भरोसा नहीं रहता है तो केवल दो ही विकल्प बचते हैं, या तो मुख्यमंत्री को उसे स्वयं ही मंत्रिमंडल से निकाल देना चाहिए अथवा मंत्री को स्वयं इस्तीफा दे देना चाहिए । इसलिए मुझे लगा कि मंत्रिपरिषद से त्यागपत्र दे देना ही बेहतर है ।’’

प्रदेश में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शर्मा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे । उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यद्यपि उन्होंने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दिया है लेकिन वह भाजपा में बने हुए हैं । भाजपा नेता ने इससे पहले कहा था कि वह तभी मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देंगे जब ठाकुर उन्हें कहेंगे ।

संपर्क करने पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि अनिल शर्मा के इस्तीफे पर मुख्यमंत्री विचार करेंगे। सत्ती ने प्रेट्र को बताया, ‘‘मुख्यमंत्री आज मंडी में हैं और कल वह शिमला आयेंगे और उसके बाद इस पर निर्णय करेंगे ।’’

राज्य सरकार के मंत्रियों महेंदर सिंह ठाकुर, राम लाल मरकंडा और गोविंद सिंह ठाकुर ने एक संयुक्त प्रेस बयान में अनिल शर्मा को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर दोबारा जनादेश लेना चाहिए ।

दूसरी ओर कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने दावा किया कि अनिल शर्मा के इस्तीफे का सत्तारूढ़ दल पर न केवल मंडी में बल्कि पूरे प्रदेश के बाकी तीनो लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा । राजभवन के एक अधिकारी ने बताया कि राज्यपाल आचार्य देवव्रत को अनिल शर्मा का त्यागपत्र अभी नहीं मिला है।

भाजपा को उम्मीद थी कि शर्मा मंडी से पार्टी उम्मीदवार राम स्वरूप शर्मा के पक्ष में प्रचार करेंगे, जो अनिल के बेटे के आश्रय के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं । लेकिन अनिल ने प्रचार करने से इंकार कर दिया और कहा कि वह इस मसले पर मंत्रिपरिषद भी छोड़ देंगे ।

अग्निहोत्री ने अनिल शर्मा से कहा है कि मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद वह कांग्रेस उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार करे । लेकिन अनिल ने कहा कि न तो वह अपने बेटे और कांग्रेस उम्मीदवार आश्रय के लिए और न ही भाजपा प्रत्याशी राम स्वरूप के लिए प्रचार करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा आशीर्वाद मेरे बेटे आश्रय के साथ है । यह मतदाताओं के ऊपर है कि वह किसे अपना मत देकर विजयी बनायेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कहा, अगर राम स्वरूप शर्मा ने मंडी में काम किया है, तो सांसद को मुख्यमंत्री की मदद लेने की बजाय काम के आधार पर वोट मांगना चाहिए।

अनिल शर्मा ने कहा कि मंडी विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने उन्हें भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुना है । उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मैं न तो भाजपा से और न ही विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दूंगा । मैं भाजपा विधायक के तौर बना रहूंगा और विधानसभा क्षेत्र के लिए काम करता रहूंगा ।’’

अपने मोबाइल फोन के कुछ संदेश प्रेट्र को दिखाते हुए अनिल शर्मा ने दावा किया, ‘‘बालीवुड अभिनेता सलमान खान ने मुझे हिमाचल के मंत्री पद पर बने रहने के लिए कहा है । सलमान ने कहा कि वह (भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व से) बात करेंगे। हालांकि, मैने उनसे पूछा अगर आप मेरे स्थान पर होते तो आप क्या करते, आप परिवार के साथ खड़ा होते या नहीं ।’’

इस पर सलमान खान ने कहा कि वह अपने परिवार के समर्थन में खड़े होते । शर्मा के बड़े बेटे आयूष शर्मा के साथ सलमान की बहन अर्पिता की शादी हुई है । पिछले कुछ दिनों से शिमला में मौजूद भाजपा नेता ने बताया कि वह शुक्रवार को ही मंडी के लिए रवाना होंगे ।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गृह जिला होने के कारण मंडी लोकसभा सीट उनके लिए नाक का विषय बन गया है । दूसरी ओर सुख राम की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है और वह अपने पोते की जीत में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे ।

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