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Chandigarh

डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए पंजाब का अधिनियम चंडीगढ़ में किया जाएगा लागू

June 25, 2019 09:35 AM

चंडीगढ़ (मयंक मिश्रा) - डॉक्टर, मेडिकल कर्मचारी और संस्थानों की सुरक्षा मुहैया कराने के लिए पंजाब की तर्ज पर चंडीगढ़ में भी एक अधिनियम लागू करने की तैयारी शुरू हो गई। इसे फिलहाल गृह मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब की तर्ज पर चंडीगढ़ में पंजाब प्रोटेक्शन ऑफ मेडिकल सर्विसेज पर्सन्स एंड मेडिकेयर इंस्टीट्यूशंस अधिनियम 2008 को लागू करने के लिए गृह मंत्रालय से सिफारिश करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही पंजाब को उपरोक्त अधिनियम के तहत 1 से 3 साल तक की सजा को बढ़ाने के लिए कहने का भी निर्णल लिया गया है।

पंजाब राज भवन में सोमवार को यूटी के प्रशासक और पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर की अध्यक्षता में बैठक हुई जिसमें इँडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), चंडीगढ़ के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया जिसमें आईएमए चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ.राजेश धीर, प्रिंसिपल सेक्रेट्री होम, चंडीगढ़ अरुण गुप्ता, डीजीपी संजय बेनिवाल, डीएचएस, यूटी डॉ.जी दिवान, राज्यपाल के सचिव जेएम बालामुरुगन मौजूद थे। बैठक में आईएमए के प्रतिनिधियों ने डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि चंडीगढ़ में ऐसा फिलहाल कोई नियम नहीं है जिससे डॉक्टरों के साथ किसी तरह की मारपीट होने पर दोषी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हो सके। ऐसे में डॉक्टर हमेशा असुरक्षा की भावना में रहते हैं।

बैठक में जहां पंजाब के अधिनियम को चंडीगढ़ में लागू करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से सिफारिश करने का फैसला लिया गया, वहीं यह तय हुआ कि पंजाब सरकार को कहा जाए कि इस अधिनियम में संशोधन करते हुए सजा को एक साल से बढ़ा कर तीन साल की जाए। बैठक में यह भी तय हुआ कि यूटी प्रशासन डीजीपी को इस मामले में निर्देश भेजेगा कि पुलिस स्टेशंस को इस बारे में जागरुक किया जाए कि मरीज या उसके रिश्तेदार द्वारा डॉक्टर के साथ मारपीट किए जाने पर एफआईआर दर्ज करने से पहले मेडिकल बोर्ड से स्पष्टीकरण लिया जाए। यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों में भी स्पष्ट है।

ध्यान रहे कि हाल ही में पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट की घटना के विरोध में चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने भी हड़ताल की थी। इस दौरान आईएमए पदाधिकारियों ने गृह सह स्वास्थ्य सचिव अरुण गुप्ता से मुलाकात कर डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट चंडीगढ़ में लागू करने की मांग की थी। उन्होंने उनकी मांग को पूरा करने का आश्वासन दिया था। इस दौरान आइएमए डॉक्टरों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी ज्ञापन सौंप कर सुरक्षा की मांग की थी। डॉक्टरों का कहना था कि एक हॉटलाइन भी शुरू की जाए और इन सभी को इस प्रकार के मामलों को रोकने के लिए वर्तमान राज्यस्तरीय कानून में शामिल किया जाए। इस प्रकार के मामलों को रोकने के लिए एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को भी नियुक्त किया जाए।

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