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प्रदेश के 156 राजकीय महाविद्यालयो के 100 कालेजो में नही है शारीरिक प्राध्यापक

August 02, 2019 06:26 AM

पंचकूला - जहा एक तरह प्रदेश सरकार प्रदेश में खेलो को बढ़ावा देने का दावा करती है और मोदी सरकार खेलो इंडिया का नारा देती है वही दूसरी तरफ हरियाणा सरकार प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए, प्रशिक्षण देने के लिए व खेलो का तकनीकी-प्रेक्टिकल ज्ञान देने में नाकाम साबित हो रही है। प्रदेश के लगभग 100 कालेजो में शारीरिक शिक्षा विषय व प्राध्यापकों के न होने के चलते युवाओ को खेलो के तकनीकी व प्रेक्टिकल ज्ञान का अभाव रहता है जिसकी वजह से खेलो में बेहतर कॉम्पिटिशन देने में युवाओ व छात्रों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

यूजीसी के अनुसार किसी महाविद्यालय को मान्यता प्राप्त होने के लिए 4 मुख्य नियुक्तियां जरूरी होती हैं जिनमे प्राचार्य, अकाउंटेट, लाइब्रेरिरियन व फिजिकल एजुकेशन का टीचर प्रमुख है जबकि सरकार द्वारा यूजीसी के नियमो की भी अवेहलना की जा रही है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा विभाग में कोई स्पोर्ट्स सेल तक नही है,यहां तक उप निदेशक तक नही है तो प्रदेश में खेलो को बढ़ावा देने का दावा तो खोखला साबित होगा ही। विजय बंसल ने कहा कि जहां प्रदेश में 300 से ज्यादा फिजिकल एक्युकेशन प्राध्यापकों की जरूरत है वही केवल 67 पद ही स्वीकृत है।

वर्कलोड के अनुसार प्राध्यपको की नियुक्ति न होने के कारण युवाओ को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। उक्त आरोप हरियाणा किसान कांग्रेस के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष व पूर्व चेयरमैन हरियाणा सरकार विजय बंसल ने लगाए है। बंसल के अनुसार प्रदेश में युवाओ को खेल प्रशिक्षण ही बेहतर नही मिल रहा तो प्रदेश के युवा खिलाड़ी देश-विदेश में प्रदेश का नाम कैसे रोशन करेंगे।

100 महाविद्यालयों में फिजिकल एजुकेशन प्राध्यापक विषय नही

प्रदेश के 156 राजकीय महाविद्यालयो में से 100 महाविद्यालयों में शारीरिक शिक्षा का विषय व प्राध्यापक तक नही है, ऐसे में सरकार का खेलो इंडिया व हरियाणा खेलो में आगे का नारा फेल साबित होजाता है। आए दिन खिलाड़ियों द्वारा सरकार का खेलो के प्रति भेदभाव व उत्पीड़न का रवैया उजागर किया जाता है। जब प्रदेश के युवाओं को कालेजो में शारीरिक शिक्षा के बारे जानकारी व खेलो का मौका नही मिलेगा तो खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कैसे करेंगे। पहले 2011 में भी फिजिकल एजुकेशन विषय को बंद किया गया था जिसके बाद उनके प्रयासों से 2015 में इस विषय को पुन: शुरू करवाया गया था।

सरकार स्पोर्ट्स फंड तो लेती है,परन्तु सुविधाए नामात्र

एनएसयूआई में राष्टीय संयोजक व राष्टÑीय खेलो में रहे खिलाड़ी दीपांशु बंसल ने कहा कि प्रदेश कि देश स्तरीय खेलो में कालेजो से निकलने वाले खिलाड़ियों व टीमो को खेल स्थलों तक ले जाने के लिए कोई बेहतर सुविधाएं सरकार द्वारा मुहैया नही करवाई जाती, अधिकतर जगह फिजिकल एजुकेशन टीचर्स न होने की वजह से खिलाड़ियों को लेकर जाने वाले तक नही होते जिस वजह से या तो खिलाड़ियों को खुद के खर्चे पर जाना पड़ता है या फिर खेलो को छोड़ना पड़ता है।

हर राजकीय महाविद्यालय में बच्चो से दाखिले के समय स्पोर्ट्स फंड लिया जाता है परन्तु खेलो के नाम पर सुविधाए नामात्र है। जहां प्रत्येक कालेज में 500 बच्चो के उप्पर एक, 1000 के उप्पर 2 व उसके बाद प्रत्येक 1000 पर एक फिजिकल एजुकेशन प्राध्यापक के नियुक्त होने की जरूरत होती है वही सरकार द्वारा इस ओर कोई ध्यान ही नही दिया जा रहा।

ब्लाक स्तर पर मल्टी पर्पस स्टेडियमो को हालत खस्ता

ब्लाक स्तर पर मल्टी पर्पस खेल स्टेडियमो की हालात ख्स्ता हो चुकी है। जिससे बाल्यकाल से ही खिलाड़ियों को उनके गांव व ब्लाक में खेलो की सुविधाएं मिल सके। इन स्टेडियमो की हालत खस्ता हो चुकी है जबकि प्रदेश के विद्यालयों तक मे भी डीपी टीचर्स नही है जिससे युवाओ व छात्रों की खेल प्रतिभा को प्रदर्शित नही किया जा रहा।

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