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यूजीसी ने कहा शोध में मात्रा की जगह गुणवत्ता को मिलना चाहिए महत्व

October 06, 2019 07:31 AM
Jagmarg News Bureau

नयी दिल्ली (भाषा) - विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी शैक्षणिक संस्थानों के कुलपतियों और प्रमुखों को यह सुनिश्चित करने के लिये कहा है कि क्रेडिट प्वाइंट , पदोन्नति या शोध डिग्री प्रदान करने का उनका फैसला किसी व्यक्ति द्वारा "प्रकाशित कार्य की गुणवत्ता" पर आधारित होना चाहिए न कि मात्रा पर।

आयोग के अधिकारियों के अनुसार यह निर्देश भारतीय अकादमिक प्रकाशन एवं अनुसंधान की विश्वसनीयता और ज्ञान रचना के हितों के मद्देनजर दिया गया है।

सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भेजे गए एक यूजीसी पत्र में कहा गया है, “कुलपति, चयन समितियां, अनुवीक्षण समितियों और अकादमिक प्रदर्शन के मूल्यांकन और आकलन में शामिल शोध पर्यवेक्षकों तथा विशेषज्ञों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी जाती है कि चयन, पदोन्नति, क्रेडिट-आवंटन और अनुसंधान डिग्री देने के मामले में उनके निर्णय प्रकाशित कार्य की संख्या के बजाय गुणवत्ता पर आधारित होने चाहिये।”

पत्र में कहा गया, "यूजीसी अनुमोदित पत्रिकाओं की पुरानी सूची' को नयी यूजीसी-केअर सूची से बदल दिया गया है और 14 जून, 2019 को सूची में शामिल पत्रिकाओं से शोध प्रकाशनों को केवल अकादमिक उद्देश्य के लिए माना जाना चाहिए।"

उच्च शिक्षा नियामक यूजीसी देश के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में मात्रात्मक शोध की तुलना में गुणात्मक अनुसंधान की आवश्यकता पर जोर देता रहा है। वार्ता ‘खत्म’ होने के बाद पहली बार तालिबान ने अमेरिकी शांति दूत से की मुलाकात

काबुल, पांच अक्टूबर (एपी) तालिबान ने अमेरिकी दूत जलमी खलीलजाद से इस्लामाबाद में बातचीत की। तालिबान के एक अधिकारी ने शनिवार को इस बारे में बताया । अफगानिस्तान में 18 साल से चल रही जंग को खत्म करने के लिए शांति समझौते को ‘खत्म’ बताने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के करीब एक महीने बाद यह बैठक हुई है।

अधिकारी ने खलीलजाद और मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के नेतृत्व में तालिबान प्रतिनिधिमंडल के बीच शुक्रवार को हुई बैठक का पूरा ब्यौरा नहीं दिया। मुल्ला अब्दुल गनी बरादर उस अभियान के सह-संस्थापक है, जिसे 2001 में अमेरिका नेतृत्व वाले गठबंधन ने बाहर किया था।

बहरहाल, अमेरिकी अधिकारियों ने अब तक यही कहा है कि शांति वार्ता बहाल नहीं हुई है और इस्लामाबाद में तो कोई बातचीत नहीं हुई । इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 18 साल के युद्ध के बाद अमेरिका अफगानिस्तान से निकलना चाहता है ।

खलीलजाद की इस्लामाबाद की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कुछ दिन पहले अमेरिका की यात्रा की थी और इस दौरान उन्होंने ट्रम्प से मुलाकात कर अफगानिस्तान में शांति की दिशा में बातचीत बहाल करने समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की थी।

खलीलजाद ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के सत्र में शामिल होने आये प्रधानमंत्री खान से भी मुलाकात की थी। वहां दोनों ने तालिबान के साथ बातचीत फिर से शुरू करने को लेकर अपने विचार साझा किये थे।

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