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Friday, October 18, 2019
Chandigarh

दो हफ्तों में चंडीगढ़ के 500 घरों में लगेंगे स्मार्ट मीटर

October 07, 2019 06:22 AM

चंडीगढ़ (मयंक मिश्रा) - शहर को स्मार्ट बनाने की दिशा में प्रशासन ने एक और कदम बढ़ा दिया है। शहर की बिजली व्यवस्था को सरल और बेहतर बनाने के लिए घरों में स्मार्ट बिजली के मीटर लगवाने के पायलट प्रोजेक्ट के तहत अगले दो हफ्तों में शहर में के किसी एक दक्षिणी सेक्टर में 500 बिजली के पॉवर मीटर्स को स्मार्ट मीटर्स में बदला जाएगा। बिजली विभाग ने मीटर खरीद लिए हैं और टेस्टिंग का काम पूरा हो गया है। स्मार्ट ग्रिड प्रोजेक्ट के तहत चंडीगढ़ के चार सेक्टरों (29, 31, 47 व 48) और थह गावों (फैदां, हल्लोमाजरा, राम दरबार, मक्खन माजरा, दड़वा व रायपुर कलां) में 30 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं जिनमें से पहले 500 मीटर 20 अक्तूबर से पहले लगा दिए जाएंगे।

स्मार्ट मीटर से उपयोग की गई बिजली के आंकड़े व डाटा कलेक्टर तक पहुंच जाएंगे। इनसे कंट्रोल रूम स्थित सेंट्रल सर्वर को जानकारी भेजी जाएगी। इस आधार पर बिलिंग होगी। स्मार्ट मीटर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि दिन में कई बार रीडिंग लेने में सक्षम हैं। एक रीडिंग रात 9 बजे होगी और दूसरी सुबह 6 बजे। इस बीच यदि बिजली की खपत नहीं हुई तो जाहिर है कि उपभोक्ता बिजली चोरी कर रहा है। बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार स्मार्ट बिजली मीटर इतने हाईटेक होंगे कि किसी भी तरह की गड़बडी होने पर कंट्रोल रूम में अलार्मिंग लाइट ब्लिंक करने लगेगी। संबंधित अधिकारियों को भी मोबाइल पर मैसेज मिल जाएगा।

ध्यान रहे कि बिजली मीटर स्काडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्यूजेशन) से जुड़ेंगे। स्काडा से ही बिजली ओवर ड्रा करने वाले उपभोक्ता को उसके मोबाइल पर चेतावनी देकर कनेक्शन बंद किया जा सकेगा। बिजली चोरी करने वाले वहीं से पकड़ में आने लगेंगे। मीटर रीडिंग कंज्यूमर के मोबाइल पर आने लगेगी। बिजली की स्मार्ट ग्रिड होने से बिजली के बार-बार गुल होने की समस्या से उपभोक्ता को छुटकारा मिल सकेगा।

स्काडा से लगेगी कि किस एरिया में बिजली गुल हुई है। वहां के जेई और एसडीओ को फौरन मैसेज फ्लैश हो जाएगा। वहीं, इसमें प्री पेड बिलिंग की व्यवस्था भी होगी। इसमें उपभोक्ता को एडवांस में पैसे जमा करवाने होंगे। उसके बाद जितनी चाहते बिजली खर्च कर कसेगा। सोलर के लिए अलग से मीटर लगाने की जरूरत नहीं होगी। मीटर की रीडिंग स्काडा तक पहुंचेगी। वहां से कंज्यूमर के मोबाइल पर बिल पहुंचने लगेगा।

दो साल पहले भेजी थी मंत्रालय को डीपीआर

प्रशासन के बिजली विभाग ने नेशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन के तहत शहर की बिजली की स्मार्ट मीटरिंग और ग्रिड करने के लिए करीब दो साल पहले 373 करोड़ 21 लाख की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाकर बनाकर केंद्रीय बिजली मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजी थी। इसमें स्मार्ट मीटर के 159 करोड़ 96 लाख, एडीएमएस स्काडा के लिए 127 करोड़ 21 लाख और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 86 करोड़ 04 लाख का प्रावधान किया गया था। प्रशासन को नेशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन के तहत 112 करोड़ और मंत्रालय से 261 करोड़ मिलने थे। इसमें से बिजली मंत्रालय की फाइनेंस पावर कार्पोरेशन द्वारा 258 करोड़ 70 लाख की मंजूरी दी गई थी।

ऐसे काम करेंगे स्मार्ट मीटर

-मीटर में लगे रिमोट डिस्कनेक्शन यूनिट से कंट्रोल रूम या मोबाइल से कनेक्शन काटा जा सकेगा।

-उपभोक्ता द्वारा उपयोग हर घंटे बिजली का अपडेट कंट्रोल रूम के पास मौजूद रहेगा।

-यदि बिजली बंद हुई तो मोबाइल पर उपभोक्ता को पता चल जाएगा।

-मोबाइल के जरिए ही घर बैठे शिकायतों का समाधान जल्द हो जाएगा।

-हर मीटर पर प्रीपेड सुविधा भी होगी। रिचार्ज कराइए और पॉवर लीजिए।

-मीटर की क्षमता से अधिक लोड होने पर सीधे कंट्रोल रूम को इसकी जानकारी मिलेगी।

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