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Friday, October 18, 2019
Chandigarh

बिजली बिल पर इस माह से लगेगा 10 पैसे प्रति यूनिट म्यूनिसिपल सेस

October 08, 2019 07:34 AM

चंडीगढ़ (मयंक मिश्रा) - शहरवासियों को इस महीने बिजली की हर यूनिट पर 10 पैसे म्यूनिसिपल सेस के तौर पर देने पड़ेंगे। इससे उनका बिजली का बिल कुछ बढ़ जाएगा। अगर किसी घर में हर माह 500 यूनिट बिजली की खपत होती है तो अब म्यूनिसिपल टैक्स के लगने के बाद 50 रुपये प्रति माह अतिरिक्त देने होंगे। प्रशासन की ओर से इस सप्ताह इस संबंध में अधिसूचना जारी की जाएगी जिसके बाद बिजली के बिल में म्यूनिसिपल सेस जुड़ कर आने लगेगा। इस म्यूनिसिपल सेस के लगने के बाद वित्तीय संकट से जूझ रहे नगर निगम को 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने लगेगी। बिजली की हर यूनिट पर भी दो पैसे काऊ सेस भी अलग से देना होगा।

नगर निगम सदन ने कुछ माह पहले म्यूनिसिपल सेस लगाने का प्रस्ताव पास किया था। इस प्रस्ताव को नगर निगम की ओर से पास करके प्रिंसिपल सेक्रेटरी लोकल बॉडी के पास भेजा गया था। बाद में वहां से इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के पास भी गया था। प्रशासन की ओर से मंजूरी दिए जाने के बाद नगर निगम ने ड्राफ्ट अधिसूचना जारी कर 15 दिनों के भीतर सुझाव व आपत्तियां आमंत्रित की थीं। लेकिन, नगर निगम को सिर्फ दो ही आपत्तियां मिलीं जिन्हें बाद में कमेटी ने विचार कर खारिज कर दिया। इसके बाद नगर निगम ने इसे प्रशासन के पास भेज दिया ताकि अंतिम अधिसूचना जारी हो सके। प्रशासन इस सप्ताह इस संबंध में अधिसूचना जारी कर देगा।

शहर में बिजली के दो लाख 16 हजार कनेक्शन हैं। जिसमें एक लाख 70 हजार घरेलू कनेक्शन हैं प्रशासन के अनुसार हर साल 17500 लाख यूनिट बिजली की खपत शहर में होती है। इसमें गर्मी में प्रतिदिन 54 लाख यूनिट जबकि सर्दी में प्रतिदिन 34 लाख यूनिट बिजली की खपत होती है। म्यूनिसिपल सेस लगाने से पहले ज्वाइंट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (जेईआरसी) की मंजूरी भी ली गई। लेकिन जेईआरसी की ओर से इस संबंधी कहा गया कि म्युनिसिपल सैस लगा सकते हैं। क्योंकि इसे पंजाब और हरियाणा में भी लगाया हुआ है। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार म्यूनिसिपल सेस से होने वाली कमाई शहर में लगी स्ट्रीट लाइटों पर ही खर्च की जाएगी।

बिजली का बिल आने से बढ़ी परेशानी

शहरवासी अपने घर और दुकान के बिजली के बिल का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें यह भी पता नहीं लग पा रहा है कि कितना बिल आया है। कई लोगों को जो बिल के भुगतान करने की हर बार अंतिम तारीख मिलती है, वह भी निकल गई है। बिजली बिल न आने का कारण यह है कि रोपड़ में पिछले दिनों बाढ़ आई है, उसके कारण बिल बनाने वाली एजेंसी (नाइलेट) के कार्यालय में भी पानी भर गया था जिससे तकनीकी तौर पर सर्वर में खराबी आ गई थी। नाइलेट का रिकॉर्ड भी बाढ़ के कारण धुल गया है।

शहर में हर उपभोक्ता को दो माह का बिजली का बिल एक साथ भेजा जाता है। ऐसे में लोग बिजली के बिल की प्रति न आने के कारण विभाग और ई-संपर्क सेंटरों के चक्कर लगा रहे हैं। पिछले दिनों बिजली बिल कैलकुलेट करने वाला सेंटर बाढ़ में डूब गया था। शहरवासियों को हार्डकापी भेजने के अलावा मोबाइल पर भी बिल की राशि का मैसेज भेजा जाता है। वह भी इस बार नहीं आया है।

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