Follow us on
Monday, September 28, 2020
Business

देश में पिछले 10 साल में माफ हुआ 4.7 लाख करोड़ रुपये का कृषि कर्ज

January 13, 2020 06:45 AM

मुंबई (भाषा) - पिछले एक दशक में विभिन्न राज्यों ने कुल 4.7 लाख करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफ किये हैं। यह उद्योग जगत से संबंधित गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) का 82 प्रतिशत है। एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गयी है।

एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, कृषि ऋण का एनपीए 2018-19 में बढ़कर 1.1 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह कुल 8.79 लाख करोड़ रुपये के एनपीए का 12.4 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2015-16 में कुल एनपीए 5.66 लाख करोड़ रुपये था और इसमें कृषि ऋण की हिस्सेदारी 8.6 प्रतिशत यानी 48,800 करोड़ रुपये थी।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘वित्त वर्ष 2018-19 में कुल एनपीए में कृषि क्षेत्र का हिस्सा महज 1.1 लाख करोड़ रुपये यानी 12.4 प्रतिशत का ही है, लेकिन यदि हम पिछले दशक में 3.14 लाख करोड़ रुपये के माफ किये गये कृषि ऋण को जोड़ें तो खजाने पर इनका बोझ 4.2 लाख करोड़ रुपये हो जाता है। यदि महाराष्ट्र में 45-51 हजार करोड़ रुपये की हालिया ऋण माफी को जोड़ दें तो यह और बढ़कर 4.7 लाख करोड़ रुपये हो जाता है, जो उद्योग जगत के एनपीए का 82 प्रतिशत है।’’

वित्त वर्ष 2014-15 के बाद 10 बड़े राज्यों ने 3,00,240 करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफ किये हैं। यदि मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2007-08 में की गयी ऋण माफी को जोड़ दें तो यह बढ़कर करीब चार लाख करोड़ रुपये हो जाता है। इसमें दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के कृषि ऋण 2017 के बाद माफ किये गये।

आंध्र प्रदेश ने 2014-15 में 24 हजार करोड़ रुपये के कृषि ऋण को माफ किया। इसी दौरान तेलंगाना ने भी 17 हजार करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफ करने की घोषणा की। तमिलनाडु ने 2016-17 में 5,280 करोड़ रुपये के कर्ज माफ किये। वित्त वर्ष 2017-18 में महाराष्ट्र ने 34,020 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश ने 36,360 करोड़ रुपये, पंजाब ने 10 हजार करोड़ रुपये, कर्नाटक ने 18 हजार करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफ किये। कर्नाटक ने इसके बाद 2018-19 में 44 हजार करोड़ रुपये की कर्जमाफी दी।

वित्त वर्ष 2018-19 में राजस्थान ने 18 हजार करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश ने 36,500 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ ने 6,100 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र ने 45-51 हजार करोड़ रुपये की कर्जमाफी की। हालांकि ये कर्जमाफियां धरातल के बजाय कागजों पर ही अधिक हुई हैं। इनमें से 60 प्रतिशत से अधिक कर्ज माफ नहीं किये जा सके हैं। सबसे खराब प्रदर्शन मध्य प्रदेश का रहा है। मध्य प्रदेश में महज 10 प्रतिशत कर्ज माफ किये गये हैं।

Have something to say? Post your comment
 
More Business News
ट्राई के प्रमुख ने कहा, डिजिटल मंचों, ऐप स्टोर, उपकरणों के लिए भी निरपेक्षता जरूरी ट्राई ने प्राथमिकता वाले प्लान में बदलाव के बाद वोडा आइडिया के खिलाफ जांच बंद की एच-1बी नौकरियों के लिए अपने लोगों को प्रशिक्षण देने पर 15 करोड़ डॉलर खर्च करेगा अमेरिका दूसरी, तीसरी श्रेणी के शहरों में छोटे वाणिज्यिक वाहनों के लिए ऋण उपलब्ध कराएगा उज्जीवन एसएफबी भारत बायोटेक ने कोविड-19 वैक्सीन के लिए वाशिंगटन विश्वविद्यालय के साथ समझौता किया सैमसंग इंडिया ने लॉन्च किया सैमसंग ई.डी.जी.ई. कैम्पस प्रोग्राम का पांचवां संस्करण रूट मोबाइल के शेयर सूचीबद्ध हुए, निर्गम मूल्य के मुकाबले 105 प्रतिशत का उछाल देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या मार्च में समाप्त तिमाही में 3.4 प्रतिशत बढ़कर 74.3 करोड़ पर जिम्मेदारी से नहीं भाग रहा केन्द्र, राजस्व नुकसान की भरपाई पर जीएसटी परिषद करेगी विचार - सीतारमण रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए सरकार ने एफडीआई का फैसला किया - गोयल