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Friday, August 14, 2020
Chandigarh

पहले चरण में सितंबर से चलेंगी 100 ई-साइकिलें, 25 डॉकिंग स्टेशन बनेंगे

July 29, 2020 10:36 AM

चंडीगढ़ (मयंक मिश्रा) - पब्लिक बाइक शेयरिंग प्रोजेक्ट के तहत शहर में सितंबर के अंत तक 100 ई-साइकिल चलनी शुरू हो जाएंगी। पहले चरण में 25 डॉकिंग स्टेशन बनाए जाएंगे, जहां से शहरवासियों को साइकिल मिलेंगी। अगले चरण में साल के अंत तक शहर को एक हजार इलेक्ट्रिक साइकिलें चलने लगेंगी। स्मार्ट सिटी के तहत इस साल चार में से 2 फेज में काम पूरा कर लिया जाएगा। स्मार्ट सिटी के अधिकारियों के अनुसार कोरोना के कारण प्रोजेक्ट में थोड़ी देर हुई है। हाल ही में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में कंपनी के अधिकारियों से काम शुरू करने के लिए कह दिया गया है। कंपनी ने एक हजार इलेक्ट्रिक साइकिलें खरीद ली हैं।

जानकारी के अनुसार इस प्रोजेक्ट के लिए पहले चरण में जो डॉकिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं उनमें पीजीआई, सुखना लेक, पेक यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी, पीयू, सेक्टर-17 और 43 बस स्टैंड शामिल हैं। जहां ई साइकिल उपलब्ध रहेगी। दस रुपये प्रति घंटे के हिसाब से शहरवासी साइकिल की सुविधा ले पाएंगे। इस समय पंचकूला में पब्लिक बाइक शेयरिंग प्रोजेक्ट चल रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत लोग अपने घर से निकलकर कहीं भी जाएंगे तो साइकिल का प्रयोग कर सकेंगे। वहीं कंपनी को इन साइकिल को सैनेटाइज करने की व्यवस्था करने को कहा गया है। ताकि कोरोना का खतरा न रहे।

ध्यान रहे कि स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी की ओर से शहर में साइकिल शेयरिंग प्रोजेक्ट चलाने वाली कंपनी को टेंडर अलॉट कर दिया गया है। स्मार्ट सिटी के अधिकारियों कहना है कि कंपनी की ओर से एसवीपी (स्पेशल व्हीकल पर्पज) का गठन किया जा रहा है। अलॉट टेंडर की एक शर्त के अनुसार अगर कोई 200 रुपये इस प्रोजेक्ट के तहत सदस्यता लेता है तो उसे आधे रेट पर ही साइकिल मिलेगी। ऐसे में सदस्य पांच रुपये अदा करके साइकिल ले सकता है।

इस सदस्यता का फायदा पीजीआई, पीयू और पेक के कर्मचारियों को मिलेगा। जो हर दिन साइकिल चलाकर अपना स्वास्थ्य ठीक रखना चाहते हैं। सदस्य बनने वालों को स्मार्ट कार्ड जारी किया जाएगा। डेढ़ साल के भीतर शहर में यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से लागू हो जाएगा जिसके तहत पांच हजार साइकिल चलेगी। जिनमें 25 फीसद ई साइकिल होंगी।

इस प्रोजेक्ट के तहत शहर में पांच हजार साइकिलें चलाई जानी हैं, जिनके लिए 670 स्थानों पर डॉकिंग स्टेशन बनेंगे। साइकिल का उपयोग करने के लिए एक स्मार्ट कार्ड व एप भी बनाया जाएगा। साइकिल में जीपीएस के साथ ही एक नंबर प्लेट होगी। मोबाइल एप के माध्यम से साइकिल नंबर डालकर ऑटोमेटिक लॉक लगा सकते हैं। 12 घंटे में साइकिल वापस न आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। यह प्रोजेक्ट 15 साल के लिए है। देश में पहली बार एक साथ किसी शहर में इतनी बड़ी संख्या में साइकिलें लाकर प्रोजेक्ट लांच किया जा रहा है।

कोरोना काल में बढ़ा साइकिल चलाने का क्रेज

शहर में पिछले कुछ दिनों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए एक्सरसाइज के तौर पर साइकिंलिंग के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। पहले जहां सुखना लेक की सभी पार्किंग सुबह-शाम कारों से भरी होती थी। वहीं अब यह कारों की पार्किंग साइकिल पार्किंग में तब्दील हो गई हैं। सुखना लेक पर सुबह का आलम ऐसा होता है जैसे चंडीगढ़ साइकिल सिटी बन चुका है और साइकिल युग फिर लौट आया है। फिटनेस से इम्यून सिस्टम बेहतर करने की सोच रेजिडेंट्स को शहर के हर कोने से सुखना लेक खींच ला रही है।

पंचकूला और मोहाली से भी सैकड़ों साइकिल राइडर पहुंच रहे हैं। रोजाना पांच हजार से अधिक साइकिल राइडर सुखना पहुंच रहे हैं। कहीं कोई साइकिल स्टैंड नहीं होने से इन्हें पार्किंग की जगह तक नहीं मिल रही। पाइप, इलेक्ट्रिसिटी पोल, रेलिंग और पेड़ जिसको जहां जगह मिल रही है, वह उससे साइकिल लॉक कर रहा है। जब यहां जगह नहीं मिल रही तो खुली पार्किंग में साइकिल पार्क की जा रही है।

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