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मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री दानवे से कृषि आर्डीनैंसों संबंधी भ्रामक बयान के लिए बिना शर्त माफी की मांग

September 16, 2020 07:08 AM

चंडीगढ़ - पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केंद्रीय मंत्री राओसाहिब पाटिल दानवे से संसद में कृषि आर्डीनैंसों सम्बन्धी देश को भ्रामक जानकारी देने के मुद्दे पर बिना शर्त माफी की माँग की है और इसको संसदीय मर्यादा और असूलों का पूर्ण उल्लंघन करार दिया है।

दानवे की तरफ से बीते दिनों लोक सभा में किसान विरोधी आर्डीनैंसों सम्बन्धी पंजाब की सहमति होने के बारे दिए गए बयान को पूरी तरह गलत करार देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री की तरफ से गई टिप्पणियाँ कांग्रेस पार्टी और राज्य सरकार को सुनियोजित तरीके से बदनाम करने की भद्दी कोशिश है। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान सुनील जाखड़ ने भी सोमवार को इस मुद्दे पर गलत बयानी करके संसद की परंपराओं को ठेस पहुंचाने के लिए केंद्रीय मंत्री की कड़ी आलोचना की और इसको भ्रामक सूचना के सहारे पंजाब की कांग्रेस सरकार को नीचा दिखाने की साजिश बताया।

मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा कि किसी भी समय उच्च ताकती कमेटी ने ऐसा कोई भी सुझाव नहीं दिया जिसके अनुसार इन किसान विरोधी आर्डीनैंसों के प्रति हामी भरी गई हो जबकि केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी की आड़ में बनाऐ इन आर्डीनैंसों को अब संसद में कानून बनाने के लिए पेश कर दिया है जोकि झूठ पर आधारित है।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि लोक सभा में केंद्रीय मंत्री की तरफ से दिया बयान ग़ैर लोकतंत्रीय और नैतिकता के खि़लाफ़ है जिसके लिए केंद्रीय मंत्री को तुरंत ही माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि संसद, लोकतंत्र के सिद्धांतों को बनाई रखने वाला एक पवित्र सदन है जहाँ इन असूलों का उल्लंघन करना मुल्क की संवैधानिक जड़ों के लिए घातक सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने किसानों के हितों और अधिकारों को घटाने वाले किसी भी कदम का हमेशा ही विरोध किया है चाहे यह कृषि सुधारों के लिए बनी उच्च ताकती कमेटी हो या फिर राज्य की विधान सभा या फिर कोई भी सार्वजनिक मंच हो। यह, उनकी सरकार है जिसने विधान सभा में इन आर्डीनैंसों को रद्द करने के लिए प्रस्ताव लाया था और उन्होंने निजी तौर पर दो बार प्रधान मंत्री को लिख कर इन किसान विरोधी आर्डीनैंसों को वापिस लेने की माँग की थी जोकि पंजाब की किसानी के लिए घातक सिद्ध होंगे।

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि उच्च ताकती कमेटी की रिपोर्ट, जिसका पंजाब को मैंबर इसके गठन से कई हफ्ते बाद में बनाया गया था, में कहीं भी ऐसे किसी आर्डीनैंस का केंद्रीय कानून का यह सुझाव नहीं दिया गया जो कि भारत सरकार की तरफ से पेश किया जाने वाला हो।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आगे कहा कि सत्य तो यह है कि रिपोर्ट का केंद्र बिंदु बाज़ारी सुधार हैं जिन अनुसार ए.पी.एम.सी. एक्ट 2003 /ए.पी.एम.एल. एक्ट 2017 को लागू करने पर ज़ोर दिया गया है। इसी तरह ही माडल कंट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट या इसके अन्य प्रतिरूपों को राज्य की ज़रूरतों अनुसार अपनाए जाने पर भी रिपोर्ट के मसौदों में ज़ोर दिया गया है।

रिपोर्ट के मसौदों संबंधी अपने जवाब में पंजाब सरकार ने यह साफ़ कर दिया था कि राज्य के 86 प्रतिशत किसान छोटे काश्तकार हैं जिनके पास 2 एकड़ से कम ज़मीन है और इसी कारण वह बाज़ार में अपना उत्पाद बेचने के लिए सौदेबाज़ी नहीं कर सकते। वह या तो अनपढ़ हैं या कम पढ़े -लिखे हैं और वस्तुओं की कीमतों तय करने के संदर्भ में उनको बाज़ारी ताकतों के रहमो-कर्म पर नहीं छोड़ा जा सकता।

उन्होंने यह भी साफ़ किया कि पंजाब जैसे कुछ राज्य मार्केट फीस पर निर्भर करते हैं, इसलिए उनकी सरकार ने इस बात की अहमीयत पर ज़ोर दिया है कि बाज़ार पर लगातार निगरानी रखने की ज़रूरत है जिससे किसानों को निजी व्यापार क्षेत्र के हाथों लूट -मार से बचाया जा सके। किसानों को अपनी उपज के लिए न्युनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) ज़रूर मिलना चाहिए जोकि उनके उत्पादों की लागत निकालने के साथ-साथ गुज़ारे के लिए उनके लिए मुनाफे की भी गुजायश रखता हो।

राज्य सरकार ने आगे कहा कि बड़ी संख्या में किसान बड़े कॉर्पोरेट घरानों के साथ कंट्रैक्ट करने से डरते हैं। किसान महसूस करते हैं कि किसी तरह की कानूनी स्तर पर लड़ाई में इन घरानों का मुकाबला करने के समर्थ नहीं हैं।

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