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Thursday, December 12, 2019
Religion
शिव की आनंद नामक कला है महामृत्यंजय स्वरूप

शिव और शक्ति मिल कर ब्रह्माण्ड का निर्माण करते हैं। इस श्रृष्टि में कुछ भी एकल नहीं है। अच्छाई है तो बुराई है, प्रेम है तो घृणा भी है। यदि एक सिरा है तो दूसरा सिरा भी होगा।  एक बिंदु के भी दो सिरे होते हैं। जिस वक्त सिर्फ एक होगा उसी वक्त मुक्ति हो जाएगी। क्योंकि कोई भी वस्तु अकेले नहीं होती है अर्थात दोनों के एक साथ मिलने पर ही मुक्ति संभव है।

अंगूठे से जानिए कैसा होगा आपका आने वाला कल

हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार हमने यह जाना कि हमारी हथेली की रेखाएं हमारे आज और आने वाले कल को निर्धारित करती हैं। आने वाले समय में हमारे साथ क्या-क्या हो सकता है, इसका झलक देती हैं। यह बात अलग है कि हस्तरेखा शास्त्र के परिणामों को एकदम सटीक नहीं माना जा सकता, लेकिन इसकी मदद से कम से कम भविष्य में आने वाली परिस्थितियों का अनुमान लगाया जा सकता है।

मानव पथ को आलोकित करता श्रीकृष्णजी का कर्म संदेश

कान्हा ने दूध पीते-पीते पूतना के प्राण पी लिए थे। माखन चुराते-चुराते अपने सखाओं का मन जीत लिया था। डरा दिया था इसने यशोदा मैया को अपने मुख में ब्रह्मांड दिखाकर। पेड़ों पर उछल-कूद मचाते, कर दिया था इसने कालीनाग का मर्दन और उसके फन पर नृत्य करते मुस्कुराते हुए, यमुना नदी से बाहर आ गए थे विजयी मुद्रा में। इसकी बंसी की धुन सुनकर गौएं और गोपियां अपनी सुध-बुध भूल जाती थीं। हो जाती थीं गोपियां इसके महारास के रस में सराबोर। ऐसा था यशोदा मैया का छोरा कन्हैया।

गणपति के अवतारों में से एक हैं वक्रतुंड

पौराणिक कथाओं के अनुसार मानव जाति के कल्याण के लिए अनेक देवताओं ने कई बार पृथ्वी पर अवतार लिए हैं। उसी प्रकार गणेश जी ने भी आसुरी शक्तियों से मुक्ति दिलाने के लिए अवतार लिए हैं। श्रीगणेश के इन अवतारों का वर्णन गणेश पुराण, मुद्गल पुराण, गणेश अंक आदि अनेक ग्रंथों से प्राप्त है। इन अवतारों की संख्या आठ बताई जाती है और उनके नाम इस प्रकार हैं, वक्रतुंड,  गजानन, एकदंत, विघ्नराज, महोदर, लंबोदर, विकट, और धूम्रवर्ण। इस क्रम में आज जानिए श्रीगणेश के वक्रतुंड अवतार के बारे में।

भगवान श्रीकृष्ण जी ने कहा था कि जो व्यक्ति जैसा सोचता है वह व्यक्ति वैसा ही बन जाता हैं।

भगवान श्रीकृष्ण जी ने कहा था कि जो व्यक्ति जैसा सोचता है वह व्यक्ति वैसा ही बन जाता हैं।